हिमाचल में पांच बीघा से कम जमीन है तो भविष्य में गैर कृषकों को भूमि बेचने की अनुमति नहीं मिल सकेगी। राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश मुजारियत एवं भू सुधार कानून 1974 में संशोधन करने की तैयारी शुरू कर दी है।
सरकार का मानना है कि पांच बीघा या इससे कम जमीन वाले किसानों को यदि गैर कृषकों को भूमि बेचने की अनुमति मिलेगी तो आने वाले समय में हिमाचल के किसान भूमिहीन हो जाएंगे। इसलिए अंतिम बची हुई पांच बीघा जमीन किसी भी गैर कृषक को बेचने की अनुमति नहीं मिल सकेगी। इससे छोटे किसानों की भूमि बची रहेगी और भविष्य में उन्हें अपने लिए भूमि तलाशने को ठोकरें नहीं खानी पड़ेगी।
सूत्र बताते हैं कि राज्य सरकार ने धारा 118 की अनुमति के ऐसे सभी मामलों को रिजेक्ट करना शुरू कर दिया है, जिनमें विक्रेता की भूमि पांच बीघा से कम हो रही थी या पहले से ही पांच बीघा से कम हो। इन मामलों में सरकार की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि हिमाचली कृषक यदि सारी भूमि बेच देंगे तो एक तो वह खुद गैर कृषक हो जाएंगे। इसके साथ ही आने वाले समय में लैंड लैस होकर सरकार से जमीन के हकदार बन सकते हैं।
ऐसी स्थिति को खत्म करने के लिए सरकार ने एक्ट की धारा 118 के तहत आने वाले सभी मामलों को गंभीरता से जांचने के बाद ही मंजूरी देने के निर्देश विभाग को दिए हैं। हिमाचल में भूमिहीन होने के बाद आईआरडीपी से लेकर कई वर्गों के लिए पात्रता बन सकती है। इससे सरकार की जिम्मेवारी बढ़ेगी और किसानों के गांव में हक हकूक भी खत्म होंगे। हिमाचली कृषकों को बचाने और उनके हकों को सुरक्षित रखने के लिए विभाग को सरकार की ओर से यह निर्देश जारी किए हैं।
राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने माना कि हिमाचली किसानों की भूमि को बचाने और कृषि योग्य भूमि बच सके, इसके लिए सरकार शीघ्र ही एक्ट में संशोधन करेगी। इस बारे में विभाग को निर्देश जारी कर दिए हैं।
गैर कृषकों को क्यों जरूरी है धारा 118 की अनुमति
हिमाचल प्रदेश मुजारियत एवं भू सुधार कानून 1974 के तहत गैर कृषकों को जमीन खरीदने का अधिकार नहीं है। इसके लिए उन्हें सरकार से इसी एक्ट की धारा 118 के तहत अनुमति लेनी होती। इस अनुमति के बाद ही हिमाचल में गैर कृषक भूमि खरीद सकते हैं।