गलोड़ (हमीरपुर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गलोड़ में आउटडेटिड हो चुकी एक्सरे मशीन मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। 30 साल पुरानी मशीन अकसर खराब रहती है। एक माह पहले इसकी वायरिंग जली है जिससे मरीजों को एक्सरे करवाने के लिए नादौन और हमीरपुर के चक्कर काटने पड़े। कुछ दिन पहले यह मशीन फिर खराब हो गई। अब यह मशीन ठीक हो गई है लेकिन कब खराब हो जाए, यह भरोसा नहीं। मशीन के अकसर खराब होने से मरीजों के समय और पैसे की बर्बादी हो रही है। एक्सरे मशीन हर माह हांफ जाती है।
आमतौर पर जब यह मशीन कार्य करती है तो स्वास्थ्य केंद्र गलोड़ में रोजाना 40 एक्सरे होते हैं। मशीन के खराब होने पर लोगों को कांगू, हमीरपुर, नादौन का रुख करना पड़ता है। बीते कुछ दिनों में यह दो बार खराब हो गई। गलोड़ की एक एनजीओ की ओर से इसकी मरम्मत करवाई गई थी। दो बार ठीक करवाने की लागत 20 हजार रुपये के करीब आई है। अब मरम्मत करने वाली कंपनी ने भी इस मशीन को बदलने की हिदायत दी है क्योंकि यह आउटडेटिड हो चुकी है।
विभाग को नई एक्सरे मशीन लगा देनी चाहिए ताकि मरीजों को इधर-उधर भटकना न पड़े। यह मशीन अकसर खराब ही रहती है।
-करनैल सिंह दुकानदार
अब नई टेक्नोलॉजी आ गई है तो नई मशीन लगा देनी चाहिए। पुरानी मशीन अक्सर खराब हो रही है। इस मशीन के नतीजे भी विश्वसनीय नहीं रहे हैं।
-नरेश कुमार निवासी लहड़ा
एक्सरे मशीन के खराब होने पिछले कई सालों से मरीज और तीमारदार परेशान हो रहे हैं। समय की बर्बादी होने से लोगों को दिक्कत पेश आ रही है।
-निर्मल सिंह. निवासी गलोड़ खास
पुरानी एक्सरे मशीन के ऊपर खर्च करने के बजाय नई मशीन लगा दी जाए तो बेहतर है। इस मशीन की कई बार मरम्मत कर काफी बजट खर्च किया गया है।
-विजय कुमार, निवासी गलोड़
समस्या को टालने की बजाय स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू जल्द विभाग को नई मशीन खरीदने के निर्देश दें।
-रोहित उर्फ अंकू, स्थानीय निवासी
यह मशीन 30 वर्ष पुरानी है। बीते दिनों इसकी वायरिंग जल गई थी। यहां रोजाना औसतन 40 एक्सरे होते है। फिलहाल मशीन ठीक है। एक्सरे किए जा रहे हैं।
-अरविंद कौंडल, बीएमओ गलोड़