नादौन में ब्यास नदी के किनारे निर्माणाधीन मध्यम सिंचाई परियोजना।
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हमीरपुर। जिला हमीरपुर के नादौन विधानसभा क्षेत्र में निर्माणाधीन मध्यम सिंचाई योजना (एमआईएस) का कार्य बजट के अभाव में लटक गया है। वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने जिला हमीरपुर की सबसे बड़ी सिंचाई योजना का शिलान्यास किया था। 90:10 के अनुपात में यह सिंचाई परियोजना बन रही है।
अनुबंध के तहत इस योजना का 90 फीसदी केंद्र सरकार, जबकि 10 फीसदी खर्च प्रदेश सरकार ने वहन करना था। लेकिन केंद्र से मिलने वाले बजट में अनावश्यक देरी से परियोजना कार्य निर्धारित अवधि के भीतर पूरा नहीं हो पाया। टेंडर अवार्ड शर्तों के अनुसार कुल 156 करोड़ रुपये खर्च कर 2015 में परियोजना का निर्माण कार्य पूरा होना था। इसके बनने से नादौन विधानसभा क्षेत्र की 2,980 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलनी है।
वर्तमान में नादौन विधानसभा क्षेत्र में सिंचाई सुविधा न के बराबर है। किसान सब्जियों के उत्पादन के लिए टैंकरों से पानी मंगवाते हैं। कुछेक ट्यूबवेल और कुछ निजी कुएं से टुल्लू पंप लगाकर फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। नादौन विधानसभा क्षेत्र में मक्की, सरसों और गेहूं की फसलें ही उगाई जाती हैं, जबकि सिंचाई सुविधा के अभाव में यहां धान की फसल नहीं होती है।
बड़ा में कृषि विज्ञान केंद्र भी है, लेकिन सिंचाई सुविधा के अभाव में यहां के किसान खेतीबाड़ी से मुंह मोड़ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने नादौन के लिए मध्यम सिंचाई योजना स्वीकृत करवाई थी। मगर अब जिस तरह बजट में रोड़े अटक रहे हैं, उससे तय है कि इस योजना का लाभ जल्द किसानों को मिलने वाला नहीं है।
जलशक्ति विभाग हमीरपुर के अधीक्षण अभियंता ई. विनोद ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार को बजट के लिए पत्राचार किया गया था। 25 करोड़ रुपये की किस्त मिली थी, जोकि खर्च हो चुकी है। अभी बकाया कार्य को पूरा करने के लिए 10 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। बजट मिलने के बाद इस योजना का लंबित कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इस योजना से नादौन के किसानों को काफी फायदा मिलेगा।