हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश मेडिकल ऑफिसर संघ की बुधवार को महत्वपूर्ण आपातकालीन बैठक नए वेतन आयोग को लेकर हुई। इसकी अध्यक्षता प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. राजेश राणा ने की। प्रदेश महासचिव डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने इस बैठक का संचालन करते हुए सभी जिला कार्यकारिणी सदस्यों की समस्याएं और सुझावों पर विचार-विमर्श किया। डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश मेडिकल ऑफिसर संघ वेतन आयोग की सिफारिशों से नाखुश है। प्रदेश सरकार ने वादा किया था कि हमारे नॉन प्रैक्टिस अलाउंस को पंजाब की तर्ज पर कम नहीं किया जाएगा, लेकिन उसे अब उसी तर्ज पर 25 फीसदी से कम कर कर 20 फीसदी कर दिया गया है।
चिकित्सक संघ ने कहा कि नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस के बारे में अधिसूचना जारी करते हुए बेसिक प्लस एनपीए की लिमिट को पंजाब से भी कम करते हुए 2,18,000 रुपये कर दिया, जोकि पंजाब में 2,37,600 रुपये है। यहां क्यों पंजाब की सिफारिश को दरकिनार किया गया। यह सरासर और सीधा प्रदेश के चिकित्सकों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। सरकार के इस दोगले रवैये पर गहरा दुख प्रकट किया और इसे अपने प्रति एक अन्याय पूर्ण फैसला माना गया। चिकित्सक संघ ने सरकार के उस फैसले को भी चिकित्सकों के साथ धोखा बताया जिसमें उनके 4-9-14 के टाइम स्केल पर कैंची चला दी गई और उसे बंद कर दिया गया।
संघ के महासचिव ने कहा कि चिकित्सकों की पदोन्नति समय अनुसार नहीं हो रही है। कई ब्लॉक में बीएमओ के पद खाली पड़े हुए हैं। सरकार ने महामारी के समय चिकित्सकों को इंसेंटिव भत्ता देने की बात कही थी, लेकिन आज तक किसी भी तरह का कोविड भत्ता मेडिकल ऑफिसर्स को नहीं दिया गया। संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि वह तुरंत 7 दिनों के भीतर इस वेतन विसंगति को दूर करे, नहीं तो संघ संघर्ष के रास्ते पर चलने पर मजबूर हो जाएगा।
इस बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. चांदनी राठौर, कांगड़ा के महासचिव डॉ. सनी धीमान, मंडी के महासचिव डॉ. विकास ठाकुर, प्रदेश संयुक्त सचिव डॉ निशांत ठाकुर, महासचिव डॉ विजय राय, आरडीए नेरचौक प्रधान डॉ. विशाल जंवाल, आरडीए महासचिव टांडा डॉ. मनोज ठाकुर, डॉक्टर जयंत ठाकुर, हमीरपुर सचिव डॉ मोहित डोगरा, शिमला से डॉ घनश्याम वर्मा और प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉ प्रवीण चौहान समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।