हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में वार्मर की सुविधा दी गई है। वार्मर का उपयोग नवजात शिशुओं को गर्म रखने के लिए किया जाता है।
इसका इस्तेमाल खासकर समय से पहले जन्मे शिशुओं या उन शिशुओं के लिए किया जाता है, जिन्हें गर्म रखने की आवश्यकता होती है। मेडिकल कॉलेज में दो से तीन जिलों के मरीज आते हैं। यहां रोजाना 15-20 प्रसव होते हैं। कुछ मामलों में नवजात बच्चों को पीलिया हो जाता है, तो कुछ बच्चों में स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां आती हैं। इस दौरान बच्चों को एनआईसीयू में रखा जाता है।
यहां पर शिशुओं के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाती है। इसमें फोटोथेरेपी की भी आवश्यकता होती है। हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से दो वार्मर की मांग की गई थी, लेकिन प्रबंधन की ओर से एक वार्मर दिया गया है। हालांकि प्रबंधन प्रयास कर रहा है कि एक और वार्मर की सुविधा दी जाए।
वार्मर एक उपकरण है, जो नवजात शिशु को स्थिर तापमान पर रखता है। यह शरीर का तापमान बनाए रखने में मदद करता है। जब शिशु को कपड़े नहीं पहनाए गए हों। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देसराज शर्मा ने बताया कि एनआईसीयू में एक वार्मर की सुविधा दी गई है। जरूरत के मुताबित एक और वार्मर देने का प्रयास किया जाएगा।