मेडिकल कॉलेज में अधिकतर यूरिन सेंपल बिना ढक्कन की डिब्बी में रखे। संवाद
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज के सैंपल कलेक्शन सेंटर के बाहर यूरिन के सैंपल छोटे डिब्बियों में रखे जा रहे हैं। इनमें से अधिकांश में ढक्कन नहीं हैं। इस वजह से मरीजों और प्रशिक्षु चिकित्सक चिंतित हैं कि खुले में सैंपल प्रभावित हो सकते हैं, जिससे जांच के नतीजे गलत आ सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार खुले यूरिन सैंपल के कई स्वास्थ्य और जांच संबंधी जोखिम हैं। यूरिन में प्राकृतिक रूप से मौजूद बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं। सैंपल में बाहरी बैक्टीरिया और फंगस भी प्रवेश कर सकते हैं, जिससे फेक पॉजिटिव या निगेटिव परिणाम आने की आशंका रहती है। इसके अलावा समय के साथ यूरिन का पीएच, रंग और नाइट्रेट/ग्लूकोज स्तर बदल सकते हैं।
वहीं, लंबे समय तक खुला रहने पर क्रिस्टलाइजेशन या तलछट बन सकती है, जिससे जांच की सटीकता प्रभावित होती है। खुले में सैंपल रखने से बैक्टीरिया की वृद्धि या बदलाव से यूटीआई या अन्य संक्रमण की गलत रिपोर्ट बन सकता है, जिससे अनावश्यक एंटीबायोटिक या उपचार शुरू हो सकता है। खुले सैंपल से बदबू फैलने से आसपास के लोगों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बन सकती है।
मेडिकल कॉलेज में रोजाना 100 से अधिक लोगों के यूरिन सैंपल जांच के लिए जमा होते हैं। सेंटर के पास कैंटीन होने के कारण मरीज और प्रशिक्षु चिकित्सक भोजन के दौरान खुले सैंपलों की बदबू और संक्रमण के खतरे से परेशान हैं। कई लोगों ने बताया कि इस स्थिति से न केवल सैंपल देना मुश्किल हो रहा है, बल्कि यहां बैठकर भोजन करना भी असुविधाजनक हो गया है।
मरीजों और तीमारदारों ने आग्रह किया है कि यूरिन सैंपल को किसी अलग और सुरक्षित स्थान पर रखा जाए और हर सैंपल के लिए ढक्कन वाली डिब्बियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के एमएस डॉ. देसराज शर्मा ने कहा कि हम स्थिति को गंभीरता से लिया जा रहा है। मरीजों और स्टाफ की सुविधा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही ढक्कन वाली डिब्बियों और बेहतर सैंपल रखने की व्यवस्था की जाएगी।