हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज और अस्पताल हमीरपुर का नाम और दर्जा तो काफी बड़ा है लेकिन सुविधाएं बेहद कम। चिकित्सक की ओर से मरीज को एक माह की तारीख देने के बाद भी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पताल की महज एक ही अल्ट्रासाउंड मशीन काम कर रही है। दूसरी मशीन बीते 19 दिसंबर से खराब है। इसके अलावा अस्पताल की एकमात्र सीटी स्कैन मशीन भी अक्तूबर 2020 से खराब है। अमर उजाला की टीम अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लेने पहुंची, तो कई खामियां उजागर हुईं।
बुधवार को सुबह 11 बजकर 35 मिनट। मेडिकल कॉलेज की रेडियोलॉजी विभाग की लैब के बाहर दो दर्जन मरीज और तीमारदार टेस्ट के लिए बारी का इंतजार कर रहे हैं। इनमें अधिकतर गर्भवती महिलाएं हैं। इनमें से कई को एक माह, कई को 25 दिन और कुछ को 15 दिन पहले अस्पताल आने पर अल्ट्रासाउंड के लिए बुधवार को बुलाया गया था। आपातकालीन परिस्थितियों में अल्ट्रासाउंड न होने पर कई लोग निजी लैब में ही टेस्ट करवाने चले गए। भूखे पेट अल्ट्रासाउंड के लिए बैठी गर्भवतियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। हेल्थ कार्ड धारकों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अस्पताल में निशुल्क टेस्ट की सुविधा है। बाकी मरीजों के लिए 800 रुपये में टेस्ट होते हैं। अस्पताल में ये सुविधाएं न मिलने के कारण मरीजों को निजी लैबों में डेढ़ से दो हजार तक रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
क्या कह रहे मरीज-
बरठीं से 25 दिन पहले मिली थी तारीख : सपना
समय सुबह 11:53 बरठीं से आई सपना अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं। वो बता रही हैं कि 23 जनवरी को को अल्ट्रासाउंड की डेट आज के लिए मिली थी। अभी वह बात ही कर रही थीं कि अंदर से उनके नाम की आवाज पड़ गई। जल्दी से उठकर वह टेस्ट करवाने गईं। बाहर आईं तो बोंलीं, आखिरकार 25 दिन बाद टेस्ट हो ही गया। अगर समय और लगता तो घर जाने के लिए शाम तक इंतजार करना पड़ता।
एक माह बाद की मिली थी तिथि : प्रवीण
समय सुबह 11:44 बजे। एक माह पहले मिली तिथि के अनुसार प्रवीण बाला सुबह साढ़े नौ बजे से अल्ट्रासाउंड के लिए बारी का इंतजार कर रही हैं। पौने बारह बजे तक भी इसका नाम नहीं आया। करीब साढ़े बारह बजे उसके नाम की आवाज लगी तो जांच हुई। इसके बाद रिपोर्ट लेकर प्रवीण बाला अपने खून की जांच करवाने के लिए लैब चली र्गइं। उन्होंने कहा कि अल्ट्रासाउंड की तिथि एक माह बाद मिल रही है।
निजी लैब में करवाई जांच : विधि
समय 12:04 बजे। विधि चंद आपातकालीन अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए आए लेकिन लैब के बाहर भीड़ देखकर वे निजी लैब की ओर चले गए। अमर उजाला की टीम जब बाहर निजी लैब की ओर गई तो 12:10 बजे विधि चंद जांच करवाने के लिए बैठे थे।
सीटी स्कैन के लिए देने पड़े दो हजार : अंकुश
अंकुश शर्मा ने कहा कि वे मंगलवार शाम करीब साढ़े तीन बजे रिश्तेदार के सिर का सीटी स्कैन करवाने आए थे। बताया गया कि सीटी स्कैन मशीन अक्तूबर से खराब है। रिश्तेदार तिलक राज का सीटी स्कैन सीनियर सिटीजन होने के नाते निशुल्क या कम पैसों पर सरकारी लैब में हो सकता था। मशीन खराब होने पर उन्हें मजबूरी में निजी लैब में दो हजार रुपये देकर सीटी स्कैन करवाना पड़ा।
दोपहर बाद जांच हुई तो ली राहत की सांस : अनीता
समय सुबह 11:46 बजे। अनीता देवी गलोड़ से बहू का अल्ट्रासाउंड करवाने आई हैं। भीड़ के चलते एक जगह पर कुर्सियां नहीं मिली। बहू अलग तो सास अलग बैठी हैं। सुबह साढ़े नौ बजे बहू बिना कुछ खाये आई है। सवा बारह बजे बहू की जांच के लिए आवाज लगी। जांच हुई तो राहत की सांस ली। रिपोर्ट लेकर चिकित्सक को दिखाने चली गईं।
रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. पवन सोनी ने कहा कि पहले के मुकाबले एक मशीन में भी उतने ही टेस्ट हो रहे हैं। बात यह है कि एक मशीन को महज तीन ही चिकित्सक ऑपरेट करते हैं। इनमें से एक छुट्टी पर है। दो में से एक चिकित्सक एक समय पर जांच कर रहा है। एनेस्थिसिया विभाग की मशीन भी यहां नहीं है। एमएस ही अधिक बता सकते हैं। तीन नई मशीनें लगनी हैं।
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके अग्निहोत्री का कहना है कि तीन नई अल्ट्रासाउंड मशीनें स्थापित की जानी हैं। इसके लिए प्रक्रिया जारी है। मरीजों को जल्द ही बेहतर सुविधा मिलेगी। सीटी स्कैन के लिए भी प्रस्ताव भेजा है।