मांगों को लेकर प्रदर्शन करते प्रशिक्षु चिकित्सक
हमीरपुर। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा नेशनल एग्जिट टेस्ट अनिवार्य किए जाने के बाद प्रशिक्षु डॉक्टरों ने विरोध शुरू कर दिया है। वर्ष 2019 बैच के प्रशिक्षुओं का अब फाइनल ईयर चल रहा है। ऐसे में यह फरमान उनके लिए सबसे ज्यादा चिंताजनक है। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में सोमवार को एमबीबीएस बैच 2019 के प्रशिक्षु चिकित्सकों ने रैली निकालकर एनएमसी के निर्णय का विरोध जताया।
प्रशिक्षु चिकित्सकों ने प्राचार्य कार्यालय से लेकर बाजार तक रैली निकाली और एनएमसी से इस फरमान को अन्य बैचों के लिए आगामी सत्र से लागू करने की गुहार लगाई है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने फरमान जारी किया है कि शैक्षणिक सत्र के बीच ही नवंबर महीने में ही नेशनल एग्जिट परीक्षा ली जाएगी।
नेशनल एग्जिट टेस्ट के आधार पर प्रशिक्षु चिकित्सकों को स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने के लिए सीटें मिलेंगी। इसके अलावा परीक्षा पास करने के बाद ही प्रशिक्षु चिकित्सकों को मेडिकल प्रैक्टिस की अनुमति भी मिलेगी। अगर टेस्ट में प्रशिक्षु फेल हो जाते हैं तो उन्हें डिग्री नहीं दी जाती हैं। साथ ही वह मेडिकल प्रैक्टिस भी नहीं कर पाएंगे।
मगर एमबीबीएस बैच 2019 के प्रशिक्षु चिकित्सकों ने जब एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की थी, तब शैक्षिणक सत्र के बीच में ही नेशनल एग्जिट परीक्षा का कोई नियम नहीं था। वर्ष 2019 के लड़कों के सीआर (क्लास रिप्रजेंटेटिव) रवि कांत, लड़कियों की सीआर इतिका शर्मा, प्रियांशु, तारुष महाजन ने कहा कि बीच सत्र में निर्णय की जानकारी दी जा रही है, जो अन्यायपूर्ण है।
फैसले को उन्होंने एनएमसी अधिनियम 2019 की धारा 49 का उल्लंघन है। बैच वर्ष 2019 के प्रशिक्षु चिकित्सकों ने मांग की कि नेशनल एग्जिट परीक्षा को अन्य बैचों के लिए लागू किया जाए, क्योंकि जब उनका बैच शुरू हुआ था तब यह पाठ्यक्रम में निर्धारित था। अब अंतिम परीक्षा सिर पर है, ऐसे में इतने कम समय में तैयारी नहीं हो सकती।