हमीरपुर। जिला हमीरपुर में एक शराब कारोबारी के ठेके पर काम करने वाले नीरज ठाकुर के पास आज खुद के 17 शराब के ठेके हैं। यही नहीं लंबलू और बोहणी में उसके पास दो होटल और चंडीगढ़ में एक आलीशान कोठी भी है। इसके अलावा कई लग्जरी वाहन भी हैं। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी अब शराब मामले में शामिल और संदिग्ध पाए गए सभी मुख्य आरोपियों की संपत्तियों की ईडी से जांच की मांग कर सकती है।
आय के स्रोतों को जांचने के बाद इस मामले में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। नीरज ठाकुर के ठिकानों पर छापा मार एसआईटी ने देसी शराब संतरा ब्रांड की आठ और अंग्रेजी शराब की पेटी बरामद की थी, जिसे एसआईटी अपने साथ मंडी ले गई। नीरज ठाकुर को एसआईटी ने शनिवार की रात चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया और हमीरपुर लेकर आए।
रविवार को भी हमीरपुर थाने के भीतर एसआईटी ने शराब कारोबारी नीरज ठाकुर से पूछा है कि हमीरपुर के पन्याला में चल रही शराब फैक्ट्री संचालक से उसके क्या संबंध हैं। शराब के अलावा अन्य कारोबार और आय के स्रोतों के बारे में भी पूछताछ की है। नीरज ठाकुर का कांग्रेस और भाजपा के कई बड़े नेताओं के साथ उठना-बैठना था। वह जिला कांग्रेस कमेटी में महासचिव के पद पर था, लेकिन अवैध कारोबार मामले में उसका नाम सामने आने पर पार्टी अध्यक्ष ने नीरज ठाकुर को पद से हटा दिया। वह हमीरपुर से विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने के दावे भी कर चुका है। लेकिन, एसआईटी की ओर से गिरफ्तार करने के बाद अब चुनाव लड़ने के सपने टूटते नजर आ रहे हैं।
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लोकल शराब से होती थी जीएसटी और ट्रांसपोर्ट खर्च की बचत
हमीरपुर। जिला हमीरपुर में चल रही शराब की फैक्ट्री से शराब खरीदने का ठेकेदारों को दोहरा फायदा होता था। एक तो उन्हें बाहर से शराब मंगवाने का झंझट नहीं रहता था। दूसरा ट्रांसपोर्ट खर्च के रूप में लाखों रुपये की बचत होती थी। इसके साथ ही लोकल शराब के एक्साइज विभाग के रिकॉर्ड में न होने के कारण इस शराब पर जीएसटी भी नहीं देना पड़ता था। जबकि, लाइसेंसी शराब फैक्ट्री से शराब मंगवाने पर ट्रांसपोर्ट और जीएसटी का खर्च उठाना पड़ता है।