हमीरपुर। नगर निगम हमीरपुर का तमगा शहर के विकास कार्यों पर भारी पड़ रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकार से ग्रांट नगर निगम हमीरपुर को नहीं मिल पाई है।
ऐसे में दो माह पूर्व नगर परिषद हमीरपुर के दौरान आवंटित टेंडर के विकास कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो सके। इससे नगर निगम बनते ही हमीरपुर शहर में विकास का पहिया थम गया है। गृह कर की उगाही को लेकर नगर निगम की ओर से 11 वार्डों में बिल जारी किए जा रहे हैं। दिसंबर में सरकार की ओर से जो ग्रांट आनी थी, वह जनवरी बीत जाने के बाद भी नहीं मिली है।
नगर निगम का खजाना किस कदर खाली हो चुका है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व में हुए कार्यों का भुगतान ठेकेदारों को नहीं किया जा सका है। नए विकास कार्यों की ओर कदम बढ़ाना तो दूर, नगर परिषद के समय के कार्यों के भुगतान के लिए ठेकेदार नगर निगम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। नगर परिषद के दौर में आठ माह पहले हुए टेंडरों के कार्य पूर्ण हो चुके हैं, लेकिन कईं कार्यों के भुगतान बाकी हैं। पूर्व में नगर परिषद कार्यकाल के दौरान शहर में करोड़ों रुपये की लागत से सौंदर्यींकरण, मरम्मत, निर्माण और अन्य कार्य हुए हैं।
अध्यक्ष की कुर्सी के चलते अधर में लटके कार्य
नगर परिषद हमीरपुर के अध्यक्ष पद को लेकर एक साल तक सियासी घमासान मचा रहा। भाजपा समर्थित पार्षदों ने नगर परिषद के हाउस से किनारा कर लिया था। इस मामले में हाईकोर्ट के निर्णय के बाद अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हुई। वोटिंग के जरिये अध्यक्ष को हटाया गया, लेकिन इस बीच नगर निगम की अधिसूचना जारी हो गई। इस तमाम सियासी घमासान के बीच हाउस के माध्यम से होने वाले कार्य भी अधर में रहे।
कोट
सरकार की ओर से मिलने वाली ग्रांट अभी नगर निगम को नहीं मिली है। बजट की कमी के चलते नए कार्य अभी शुरू नहीं किए गए हैं। वित्तीय वर्ष का अंतिम माह है। ग्रांट मिलने और गृहकर की उगाही के बाद जल्द विकास कार्यों को गति दी जाएगी।
-राहुल चौहान, आयुक्त, नगर निगम, हमीरपुर