संवाद न्यूज एजेंसी गलोड़ (हमीरपुर)। हिमाचल के कई क्षेत्रों में रक्षाबंधन से गुग्गा जाहरवीर महाराज की गाथा घर-घर सुनाने की परंपरा है। रक्षाबंधन के दिन गाथा मंडलियां गुग्गा मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद गांवों में जाकर दिन में घर-घर गुग्गा जाहरवीर की गाथा का गुणगान करती हैं, जबकि रात को गांव में डेरा डालती हैं।
इस बार गुग्गा नवमी का पर्व पांच सितंबर को मनाया जाएगा। गुग्गा जाहरवीर की लोकआस्था किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है। हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग समुदायों के लोग उनकी पूजा करते हैं। रक्षाबंधन के आसपास गाथा मंडलियों द्वारा घर-घर जाकर कथा सुनाने की परंपरा इसी लोकश्रद्धा का हिस्सा है। गुग्गा नवमी पर गुग्गा मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और मेलों का आयोजन होता है।