कमलेश रतन भारद्वाज
हमीरपुर। पंचायतीराज चुनाव में जिले के भीतर भाजपा को इस बार विरोधी दलों से ज्यादा अपनों की नाराजगी ने असहज कर दिया है।
अंतिम दौर में कई बागी नेताओं को मनाकर चुनावी मैदान से बाहर करने में भाजपा संगठन भले कामयाब रहा हो, लेकिन महिला पदाधिकारियों की नाराजगी अब भी पार्टी के लिए सिरदर्द बनी हुई है।
ताल वार्ड में बगावत पर उतरे सुशील ठाकुर नामांकन से पीछे हट गए और बिझड़ी में भाजपा के रवि कुमार के कदम पार्टी के खिलाफ नहीं बढ़े, लेकिन जिला परिषद के ऊहल, पनोह और दांदड़ू वार्ड में भाजपा संगठन से जुड़ी चार महिला नेता समर्थित प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव मैदान में डटी हैं।
19 वार्ड वाले जिला परिषद हमीरपुर में तीन वार्ड में भाजपा में, जबकि एक वार्ड में कांग्रेस में बगावत देखने को मिल रही है।
नामांकन वापसी तक संगठन स्तर पर लगातार संवाद, बैठकों का दौर चला, लेकिन कोई भी महिला नेता पीछे हटने को तैयार नहीं हुई। दिलचस्प यह है कि चुनावी मैदान में डटी अधिकांश महिलाएं पार्टी संगठन में सक्रिय पदों पर हैं।
ऐसे में चुनावी मुकाबले के साथ संगठनात्मक अनुशासन का सवाल भी खड़ा हो गया है। इन वार्डों में मुकाबला अब केवल जीत-हार तक सीमित नहीं रह गया है। यह चुनाव संगठनात्मक पकड़ पर सवाल और स्थानीय नेतृत्व की स्वीकार्यता और गुटीय संतुलन की भी परीक्षा बन चुका है।
वहीं, भाजपा की तरह कांग्रेस भी पूरी तरह एकजुट नजर नहीं आ रही। बड़सर विधानसभा क्षेत्र के बिझड़ी वार्ड में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के खिलाफ भी बगावती तेवर देखने को मिल रहे हैं, जिससे मुकाबला बहुकोणीय होता नजर आ रहा है। बड़सर विधानसभा क्षेत्र के बिझड़ी में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के खिलाफ परमजीत शर्मा उर्फ डैंफा चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी संदीप सिंह हैं, जबकि भाजपा समर्थित प्रत्याशी विकास कुमार हैं।
ऊहल बना सबसे बड़ा सियासी रण
जिला परिषद वार्ड ऊहल भाजपा के लिए सबसे पेचीदा सीट बन गया है। यहां पांच प्रत्याशियों में तीन चेहरे भाजपा विचारधारा से जुड़े हैं। असल विवाद तब शुरू हुआ, जब पार्टी समर्थित प्रत्याशी की सूची में कुछ ही घंटों के भीतर बदलाव कर दिया गया।
पहले ज्योति ठाकुर के नाम पर सहमति बनी, लेकिन बाद में संशोधित सूची में मंगलेश ठाकुर को समर्थन दे दिया गया। सूची में इस बदलाव के बाद नाराजगी खुलकर सामने आई और भाजपा के संभावित पैनल में शामिल जिला भाजपा उपाध्यक्ष सुमन चौहान भी मैदान में उतर गईं। सुमन का कहना है कि संगठन स्तर पर उन्हें चुनाव लड़ने का भरोसा दिया गया था और उसी आधार पर उन्होंने अन्य राजनीतिक विकल्प भी छोड़े।
दूसरी ओर भाजपा महिला मोर्चा की जिला सचिव ज्योति ठाकुर भी मैदान में डटी हैं। उनका कहना है कि जब पार्टी ने पहले उनका नाम आगे किया तो कार्यकर्ताओं के बीच संदेश जा चुका था, ऐसे में पीछे हटना उनके लिए आसान नहीं था। हालांकि बिझड़ी वार्ड में ऐन मौके पर भाजपा ने रवि कुमार की बजाय विकास को प्रत्याशी तय किया था, लेकिन यहां पर कोई सियासी बखेड़ा नहीं हुआ है।
पनोह में प्रदेश पदाधिकारी वीना की बगावत
जिला परिषद वार्ड पनोह में भाजपा समर्थित प्रत्याशी के सामने पार्टी की वरिष्ठ पदाधिकारी और पूर्व जिला परिषद सदस्य वीना कपिल चुनाव मैदान में हैं। प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाल रहीं वीना की मौजूदगी ने इस सीट को भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण बना दिया है। वीना कपिल भाजपा शहरी निकाय प्रकोष्ठ की प्रदेश सहसंयोजक हैं।
दांदड़ू में भी नहीं थमा असंतोष
बड़सर के दांदड़ू वार्ड में भाजपा मंडल की सचिव रजनी पीला पार्टी समर्थित प्रत्याशी के खिलाफ मैदान में हैं। इससे साफ है कि जिला में असंतोष केवल एक-दो सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई इलाकों में स्थानीय समीकरण संगठनात्मक फैसलों पर भारी पड़ते दिख रहे हैं।
कोट
पार्टी के अधिकृत जिला परिषद प्रत्याशियों के समर्थन में पार्टी कार्यकर्ता चुनाव प्रचार में डटे हैं। वह कार्यकर्ता जो कि पार्टी अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, उनकी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को भेजी जाएगी।
-राकेश ठाकुर, जिलाध्यक्ष हमीरपुर भाजपा