पदम श्री अवार्ड प्राप्त करतार सिंह सोंखले ने बांस से बनाई कलाकृतियां। स्रोत : स्वयं
हमीरपुर। बांस से कलाकृतियां बनाने की पारंपरिक कला को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए युवाओं को विशेष प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है, लेकिन जिले में अभी तक इस दिशा में कोई नई योजना शुरू नहीं हो पाई है।
इसके चलते बांस की कलाकृतियां बनाने का प्रशिक्षण वर्तमान में मुख्य रूप से बुजुर्गों तक ही सीमित होकर रह गया है, जिससे इस पारंपरिक हुनर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
जिले में इस पारंपरिक कला को सहेजने और आगे बढ़ाने का कार्य पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करतार सिंह सोंखले कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में चीफ फार्मासिस्ट के रूप में सेवाएं देने वाले हमीरपुर जिला के नौहंगी निवासी करतार सिंह सोंखले 26 वर्षों से बांस के माध्यम से हिमाचल की पारंपरिक कला और संस्कृति को आकार दे रहे हैं।
उल्लेखनीय योगदान : उन्होंने बांस से कई पारंपरिक धरोहरों और प्रदेश के प्रसिद्ध मंदिरों के नमूनों का निर्माण करने के साथ-साथ बोतलों में भी कई प्रसिद्ध विरासतों को खूबसूरती से उकेरा है।
युवाओं को प्रेरणा: बांस से बनी एक कलाकृति 20 से 25 हजार रुपये तक बिकती है। करतार सिंह सोंखले अब इस कला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए युवाओं को प्रशिक्षित कर रहे हैं, ताकि वे इसे रोजगार का माध्यम बना सकें।
यदि स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन यानी बांस के उपयोग के लिए नियमित प्रशिक्षण शिविर और व्यापक योजनाएं शुरू की जाएं, तो युवा सजावटी और घरेलू वस्तुएं तैयार कर बेहतरीन आय अर्जित कर सकते हैं।
पदम श्री अवार्ड प्राप्त करतार सिंह सोंखले ने बांस से बनाई कलाकृतियां। स्रोत : स्वयं
पदम श्री अवार्ड प्राप्त करतार सिंह सोंखले ने बांस से बनाई कलाकृतियां। स्रोत : स्वयं