मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया। -स्रोत : संस्थान
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज, हमीरपुर के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि आत्महत्या एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है, जो हर साल दुनियाभर में सात लाख से अधिक मौतों का कारण बनती है। यह मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण है और 15-29 वर्ष की आयु के युवाओं में इसका प्रभाव सबसे अधिक होता है।
डॉ. रमेश भारती मंगलवार को मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आत्महत्या परिवारों, समुदायों और पूरे देश पर गहरा प्रभाव डालती है, जिसका दीर्घकालिक सामाजिक, भावनात्मक और आर्थिक परिणाम होता है।
उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य विकार और शराब/नशीली दवाओं के दुरुपयोग का आत्महत्या से सीधा संबंध है। मानसिक स्वास्थ्य विकार और आत्महत्या को अक्सर कलंक के रूप में देखा जाता है, जिससे लोग इन मुद्दों पर खुलकर बात नहीं करते। डॉ. भारती ने आग्रह किया कि हमें मानसिक स्वास्थ्य विकार और आत्महत्या के बारे में खुले तौर पर बात करनी चाहिए और जागरूकता बढ़ानी चाहिए। आत्महत्या को रोकने और मदद मांगने के व्यवहार को प्रोत्साहित करने के लिए समाज में खुली बातचीत की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. कमल प्रकाश और डॉ. महिंद्र ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य विकार और आत्महत्या के कारणों पर जागरूक किया।