हमीरपुर। प्रदेश में वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने के लिए चिकित्सकों ने संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया है। मेडिकल ऑफिसर संघ के प्रदेश महासचिव डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने कहा कि प्रदेश के सभी चिकित्सक चाहे वे मेडिकल कॉलेजों का शिक्षक वर्ग है, रेजिडेंट डॉक्टर्स हैं या फील्ड के स्वास्थ्य संस्थानों के डॉक्टर हैं, सभी पे-कमीशन की विसंगतियों के विरोध में एकजुट हैं। डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने बताया कि संयुक्त संघर्ष समिति की एक वर्चुअल बैठक हुई है। संयुक्त संघर्ष समिति में प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के शिक्षक चिकित्सक संघ, सभी रेजिडेंट डॉक्टर संघ शामिल हैं। इसके अलावा प्रदेश डेंटल मेडिकल ऑफिसर संघ, प्रदेश वेटरनेरी चिकित्सक संघ भी इस संयुक्त संघर्ष समिति के प्रमुख सदस्य हैं।
समिति ने कहा कि हिमाचल प्रदेश मेडिकल ऑफिसर संघ की तरफ से इस वेतन आयोग की वेतन विसंगतियों को लेकर जो पत्र मुख्यमंत्री को लिखा गया है, उसके तहत अभी तक कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। यह वेतन विसंगतियां चिकित्सकों के हितों पर कुठाराघात है, उनको जल्द से जल्द दूर किया जाए। चिकित्सकों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है। 2 साल का सेवाकाल पूरा कर चुके सभी अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने की अधिसूचना सभी विभागों में जारी हो गई है और लोगों ने ज्वाइन भी कर लिया है, लेकिन प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में आज तक 2 साल पूरा कर चुके स्वास्थ्य कर्मी जिनमें चिकित्सक, नर्सेज, फील्ड के स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल हैं, अपनी रेगुलर नियुक्ति की बाट जोह रहे हैं।
प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सक शिक्षक वर्ग की तरक्की भी कई वर्षों से रुकी पड़ी है। उनके घाव पर नमक छिड़कने के लिए मेडिकल कॉलेजों में कमीशन से सीधे एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के फरमान जारी किए जा रहे हैं, जोकि सरासर गलत और अन्याय पूर्ण कदम है। प्रदेश के विशेषज्ञ कई वर्षों से अपने पीजी अलाउंस को बढ़ाने की मांग सरकार के सामने उठा चुके हैं। अब जब नए आयोग की सिफारिशों को लागू करने की अधिसूचना जारी हुई तो उसमें चिकित्सकों की, चाहे वह किसी भी विभाग के हैं, कैसे वेतन की गणना की जानी चाहिए, इस संदर्भ में भी स्पष्ट तरीके से अधिसूचित नहीं किया गया है। संघर्ष समिति ने सरकार से कहा है कि चिकित्सकों के एनपीए को पहले की तर्ज पर 25 फीसदी ही रहने दिया जाए।