नादौन(हमीरपुर)। सर्वशिक्षा अभियान के तहत शिक्षा का अधिकार अधिनियम की उपमंडल नादौन में धज्जियां उड़ाई जा रही है। आज भी दर्जनों ऐसे बच्चे मिलेंगे जिन्होंने स्कूल के दर्शन तक नहीं किए।
नादौन बस स्टेंड के पास ऐसे दर्जनों बच्चे देखे जा सकते हैं जो कि दिन भर मिट्टी में खेलते नजर आएंगे। शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान हमीरपुर स्थित गौना करौर में पिछले वर्ष एक युवक को नादौन बस स्टैंड के पास झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए तैनात किया गया था। कुछ माह बाद ही विगत मार्च महीने से उसे मानदेय न मिलने से उसने पढ़ाना बंद कर रखा है। शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान के अधिकारियों से जब इस बारे में बात की जाती है तो एक वे झुग्गियों में रहने वाले लोग थोड़े अंतराल के बाद दूसरे स्थान पर चले जाते हैं, का बहाना लगाकर अपना पल्ला झाड़ने का काम कर रहे हैं। लेकिन इसके उल्ट नादौन क्षेत्र में कई ऐसे परिवार हैं जो कि कई वर्षों से लगातार यहां रह रहे हैं।
उनके बच्चों को पढ़ाने की किसी को चिंता नहीं। इसी प्रकार नादौन उपमंडल के रंगस, गौना-करौर, धनेटा, बसारल, कांगू, नौहगी, रैल आदि स्थानों पर कई दूसरे प्रदेशों से मजदूरी करने आए परिवारों के बच्चे शिक्षा से वंचित हैं। नादौन में रहने वाले प्रवासी बच्चों चांदनी, ब्रजेश, गुलाब चंद, शंभू व खुशबू, पूजा बेटी सतनारायण, नंदनी व अंजलि पुत्री भूचा साहनी, चांदनी पुत्री कर्ण सिंह, अंजलि पुत्री दुखिया, ममता पुत्री प्रमोद, सुमन, ज्योति, गोपाल, सूरज पुत्र संजू, अमृत पुत्र नारंग, सुनील व कार्तिक पुत्र लखन, सिकंदर व जौनी पुत्री बलदेव, निश पुत्र सहारानाथ आदि ने बताया कि आज तक उन्होंने स्कूल का मुंह तक नहीं देखा है।
इतना ही नहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने भी इन बच्चों को केंद्र में लाने की पहल नहीं की है। डाइट प्रधानाचार्य जगदीश कौशल से बात करने पर उन्होंने बताया कि ज्यादातर बच्चे ऐसे हैं जो कि कुछ समय बाद अपना स्थान बदल लेते हैं। जिस कारण उन्हें पढ़ाना कठिन काम है।