हमीरपुर। पटियाऊ की श्यामा ने कृत्रिम आभूषण निर्माण को अपना व्यवसाय बनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी मिसाल पेश की है। श्यामा घर बैठे फैंसी चूड़ियां, हार, झुमके आदि सजावटी आभूषण बनाकर हर माह हजारों रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
श्यामा एक साधारण ग्रामीण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। परिवार की आय का मुख्य स्रोत खेती और मजदूरी था, जो बढ़ती महंगाई के दौर में पर्याप्त नहीं था। घर की जिम्मेदारियां, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करना मुश्किल होता जा रहा था।
आरसेटी मटनसिद्ध में उन्होंने कृत्रिम आभूषण बनाने का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण में उन्हें फैंसी चूड़ियां, मोती के हार, स्टोन ज्वेलरी, कुंदन आभूषण और शादी समारोह में उपयोग होने वाले विशेष डिजाइन के आभूषण बनाना सिखाया गया। शुरुआत में उन्हें यह काम कठिन लगा, लेकिन धीरे-धीरे अभ्यास और लगन से उन्होंने इसमें दक्षता हासिल कर ली।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद श्यामा ने अपने घर के एक कमरे में छोटा सा कार्यस्थल तैयार किया। शुरुआत में उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ काम शुरू किया। कच्चा माल स्थानीय बाजार से खरीदा और कुछ आभूषण बनाकर अपने परिचितों और रिश्तेदारों को दिखाए। आज श्यामा द्वारा बनाए गए कृत्रिम आभूषणों की मांग आसपास के गांवों और कस्बों में काफी बढ़ गई है।
विवाह, सगाई, तिलक और अन्य पारिवारिक समारोहों के लिए लोग उनसे विशेष रूप से फैंसी चूड़ियां, हार और झुमके बनवाते हैं। शादी के सीजन में तो उनके पास काम की कमी नहीं रहती। कई बार उन्हें पहले से ऑर्डर लेने पड़ते हैं, ताकि समय पर सभी आभूषण तैयार किए जा सकें।
पटियाऊ की श्यामा द्वारा घर पर तैयार किए कृत्रिम आभूषण। संवाद