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प्रवासियों ने धूमधाम से की छठ मैया की पूजा

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गलोड़ में छठ पूजा करते लोग। - फोटो : Hamirpur-HP
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गलोड़/नादौन। उपमंडल नादौन में रह रहे प्रवासी लोग छठ का त्योहार धूमधाम से मना रहे हैं। बुधवार को आरंभ हुए इस महापर्व की शुक्रवार को खरना की रस्म पूर्ण की गई। हिंदू धर्म में केवल यही एक त्योहार है जिसमें डूबते सूरज की पूजा की जाती है। वीरवार को महिलाओं ने व्रत की शुरुआत की। छठ मैया को चावल व दूध के पकवानों का प्रसाद चढ़ाया गया। शुक्रवार शाम के समय महिलाओं ने नदी किनारे खड़ी होकर ढलते सूरज की पूजा की। इस दौरान नदी किनारे संगीत पर लोग खूब झूमे। महिलाओं ने नदी के पानी में उतर कर पूजा की। 4 दिन के इस पर्व में दूसरे दिन खरना की रस्म के लिए उपवास होता है। इसका अर्थ है शरीर व मन की शुद्धि। रात को पूजा के बाद एक समय भोजन किया जाता है। यह पर्व नई फसल का भी उत्सव होता है।
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प्रवासी लोगों राजेश, राजेंद्र, मनीष, कुलदीप आदि ने कहा कि पौराणिक कथा के अनुसार जब पांडव जुए में अपना राजपाठ हार गए थे तब द्रोपदी ने छठ का व्रत किया था। उसके बाद उन्हें राजपाठ वापस मिल गया था। इसलिए यह पर्व सुख समृद्धि का भी है। साथ ही द्रोपदी ने सूर्य की भगवान की पूजा भी की थी। छठ मैया को सूर्य देव की बहन माना जाता है। नादौन में हर वर्ष प्रवासी लोगों की ओर से यह त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। नदी किनारे व अन्य स्थलों पर रह रहे प्रवासियों ने अपनी झुग्गी बस्ती में काफी सजावट कर रखी है। जगह-जगह छठ मैया के मंदिर बनाए गए हैं। जिन्हें भी बड़े सुंदर तरीके से सजाया गया है। शुक्रवार शाम के समय नदी किनारे बड़ी तादाद में प्रवासी लोग पहुंचे। जहां पर ढलते सूरज की पूजा की रस्म निभाई गई। इस दौरान यहां पर डीजे लगाकर प्रवासी लोगों ने धूमधाम से इस पूजा को संपन्न किया।
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