दियोटसिद्ध (हमीरपुर)। लाखों श्रद्धालुओं के आस्था के केंद्र विश्व प्रसिद्ध सिद्धपीठ बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध के परिसर में चैत्र मास मेलों में रोट नियमों को ताक पर रख कर बेचा जा रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से यहां पर रोट बिक्री के मानक तय किए गए हैं। मानकों के तहत रोट की पैकिंग और इस पर प्रयोग की तिथि दर्शाई जानी जरूरी है। यदि रोट की पैकिंग उपलब्ध नहीं है तो रोट बिक्री की दुकानों पर ही रोट के निर्माण और इसे उपयोग किए जाने की तिथि दर्शाई जानी अनिवार्य की गई है लेकिन नियमों की लगातार अवहेलना हो रही है। विक्रेताओं की ओर से न तो रोट की पैकिंग की जा रही है और न ही दुकानों पर प्रयोग से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की जा रही है।
वर्ष 2025 के शुरूआत में मंदिर ट्रस्ट की कैंटीन और परिसर की एक दुकान से लिए गए रोट के सैंपल की रिपोर्ट खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में फेल हो गई थी। इसके बाद से रोट बिक्री में सतर्कता बरतने को लेकर बाकायदा एडवाइजरी भी खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से जारी की गई। इस कड़ी में भोग योजना को भी मंदिर में लागू करने का निर्णय लिया। इस योजना को लागू करने का कार्य चल रहा है। इस बीच विभाग की ओर से रोट की बिक्री के संबंध में विक्रेताओं को जागरूक करने के लिए कार्यशाला का आयोजन भी किया गया। इस दौरान रोट की लैब में जांच कर इसकी प्रयोग की समय सीमा भी निर्धारित की गई। 20 दिनों तक रोट को प्रयोग किए जाना सुरक्षित पाया गया। अब लगातार कोताही सामने आ रही है।
चैत्र मास मेलों में श्रद्धालुओं की खासी भीड़
चैत्र मास मेलों के दौरान लाखों श्रद्धालु बाबा के दरबार में शीश नवाने पहुंचते हैं। अधिकतर श्रद्धालु बाबा के दरबार में रोट अर्पित करने के बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। लोग इस रोट को घरों को ले जाते हैं और कई दिनों तक प्रयोग करते हैं। रोट को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। ऐेसे में विक्रेताओं की कोताही श्रद्धालुओं पर भारी पड़ सकती है।
विक्रेताओं को हिदायत जारी की गई है कि रोट के उपयोग की जानकारी श्रद्धालुओं को देने के साथ पैकिंग में इस बारे में जिक्र किया जाए। यदि इसमें कोताही बरती जा रही है तो नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
-अनिल शर्मा, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग हमीरपुर