संवाद न्यूज एजेंसी
अवाह (हमीरपुर)। अब सड़क बनेगी तो ही वोट मिलेगा, वरना चुनाव का बहिष्कार करेंगे। यह आक्रोश अवाह गांव की हरिजन बस्ती की महिलाओं का है, जो दशकों से सड़क सुविधा से वंचित हैं। आजादी के बाद भी इस बस्ती के लिए खड़ी चढ़ाई और कच्ची पगडंडियां ही एकमात्र सहारा बनी हुई हैं।
नेशनल हाईवे से महज दो-तीन किलोमीटर दूर स्थित इस बस्ती तक आज भी वाहन नहीं पहुंच पाते है। ऊना-हमीरपुर वाया भोटा राष्ट्रीय राजमार्ग के नजदीक स्थित अवाह गांव की यह हरिजन बस्ती मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है।
मंगलवार को पूर्वाह्न 11 बजे हैं। ऊपरला अवाह गांव की सड़क के पास बस्ती की महिलाएं एकत्र हुई हैं। शुरुआत में कैमरे से झिझक रही महिलाएं तब खुलकर बोलीं, जब एक बुजुर्ग ने कहा कि अब नहीं बोले तो जिंदगी भर भुगतते रहोगे।
मक्कड़ पंचायत के तहत आने वाली इस बस्ती को वर्ष 2023 में सड़क से जोड़ने का प्रयास किया गया था। मनरेगा के तहत एंबुलेंस योग्य संपर्क सड़क बनाई गई, जिस पर लाखों रुपये खर्च हुए और बड़ा डंगा लगाया गया।
यह सड़क ऊपरला अवाह गांव से जुड़नी थी, लेकिन बरसात में डंगा ढह गया। इसके बाद आधी-अधूरी सड़क की सुध किसी ने नहीं ली। वहीं, पंचायत मक्कड़ के प्रधान नीरज शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए अपनी जमीन की गिफ्ट डीड लोक निर्माण विभाग को दी है। बजट मिलते ही सड़क निर्माण शुरू होने की उम्मीद है।
अवाह बस्ती से सड़क की ओर पैदल आती महिलाएं। संवाद।
अवाह बस्ती से सड़क की ओर पैदल आती महिलाएं। संवाद।
अवाह बस्ती से सड़क की ओर पैदल आती महिलाएं। संवाद।
अवाह बस्ती से सड़क की ओर पैदल आती महिलाएं। संवाद।
अवाह बस्ती से सड़क की ओर पैदल आती महिलाएं। संवाद।
अवाह बस्ती से सड़क की ओर पैदल आती महिलाएं। संवाद।