फस्टे की रेणुबाला घर पर कपड़े के बैग सिलते हुए। संवाद
हमीरपुर। आज के दौर में आत्मनिर्भरता केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन को बदल देने वाली सोच बन चुकी है। इसी सोच को फस्टे गांव की रेणुबाला ने साकार कर दिखाया है।
सीमित संसाधनों और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने हुनर को पहचाना और कार्य शुरू कर आज वे प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
रेणुबाला ने बताया कि उन्हें बचपन से ही सिलाई का शौक था, लेकिन शादी के बाद घरेलू जिम्मेदारियों के चलते यह शौक पीछे छूट गया। जब परिवार की जरूरतें बढ़ीं और आर्थिक दबाव महसूस होने लगा, तो उन्होंने दोबारा सिलाई मशीन संभालने का निर्णय लिया। शुरुआत में उन्होंने घर से ही छोटे-छोटे ऑर्डर लेने शुरू किए। प्लास्टिक पर प्रतिबंध और पर्यावरण जागरूकता को देखते हुए उन्होंने कपड़े के बैग बनाने शुरू किए।
शुरुआत में कुछ बैग बनाकर स्थानीय दुकानदारों को दिखाए, जिन्हें दुकानदारों ने पसंद किया और यहीं से उन्हें नियमित ऑर्डर मिलने लगे। आज रेणुबाला मुख्य बाजार में कपड़े के बैग की नियमित सप्लाई कर रही हैं।
किराना, कपड़े और अन्य दुकानों के लिए वह अलग-अलग डिजाइन और साइज के बैग तैयार करती हैं। उनके बैग न केवल मजबूत होते हैं, बल्कि आकर्षक भी होते हैं। संवाद