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Hamirpur (Himachal) News: रली का विवाह आज धूमधाम से मनेगा

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सुजानपुर में रली विवाह को लेकर पूजा अर्चना करती महिलाएं। संवाद
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सुजानपुर (हमीरपुर)। उपमंडल सुजानपुर में इस वर्ष भी रली विवाह धूमधाम से आयोजित किया जाएगा। भगवान शिव की बरात को लेकर आयोजक दूल्हा पक्ष ने कमर कस ली है। मां गौरी यानी दुल्हन पक्ष ने भी मंडप सजा दिए हैं। गीत संगीत रली विवाह में चार चांद लगा रहा है। रली पूजन के नाम से इस पर्व को लेकर के एक माह पहले चैत्र संक्रांति से गीत संगीत शुरू हो जाता है। मिट्टी से बनाई गई गौरी और भगवान शिव की मूर्तियों का पूजन चलता है। जहां एक परिवार दुल्हन की रस्म पूरी करता है वहींं दूसरा परिवार दूल्हा पक्ष की रस्में रीति रिवाज से निभाता है।
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त्योहारों को लेकर कोई न कोई कहानी जुड़ी हुई है। रली पूजन में अविवाहित लड़किया शिव और पार्वती की पूजा कर उनकी मूर्तियों का विवाह रचाती हैं। यह पूजन चैत्र संक्रांति से शुरू हो जाता है और एक माह तक जारी रहता है। इसकी एक किंवदंती प्रचलित है कि कांगड़ा जनपद के किसी गांव में एक ब्राह्मण ने अपनी नौजवान कन्या रली का विवाह उससे आयु में बहुत छोटे लड़के से कर दिया। कन्या ने इस संबंध में विरोध भी किया लेकिन माता-पिता के सामने उसकी एक न चली। अंतत: उसे मजबूरन विवाह के लिए हां करनी पड़ी। उस समय रिश्ते माता-पिता ही तय करते थे। कन्या रली का विवाह शंकर नामक लड़के के साथ हो गया। कन्या को घर से विदा कर दिया गया। परंपरानुसार उस कन्या का छोटा भाई जिसका नाम वास्तु था, उसे छोड़ने गया। रास्ते में एक नदी पड़ती थी। जब डोली उस नदी के पास पहुंची तो रली ने कहारों से डोली रोकने को कहा और भाई को बुला कर कहा जो भाग्य में लिखा था वह हो ही गया। मैं किसी को इसके लिए दोष नहीं दूंगी। अत: मैं पूरी जिंदगी अपने से आयु में छोटे पति के साथ नहीं गुजार सकती हूं। रली ने कहा आज के उपरांत जो भी कन्या चैत्र मास में शिव-पार्वती की पूजा करके उनका विवाह रचाएगी, वह मनचाहा वर पाएगी। ऐसा कहने के उपरांत वह कन्या नदी में कूद गई। जब दूल्हे ने उसे नदी में कूदते देखा तो उसने भी छलांग लगा दी, दोनों नदी की तेज धारा में बह गए। तब से यह त्योहार प्रत्येक गांव में छोटी अविवाहित कन्याओं की ओर से मनाया जाता रहा है, लेकिन आज की स्थिति बदल चुकी है। अब रली पूजन परंपरा बहुत कम है लेकिन सुजानपुर में आज भी कई वर्षों से रोशन लाल चौधरी इस परंपरा को निभाते आए हैं। इनका परिवार बड़े चाव से इस परंपरा को रीति रिवाज के मुताबिक निभा रहा है। एक माह पहले इन्होंने मां गौरी की मूर्ति का पूजन शुरू कर दिया है तथा दूल्हा पक्ष के रूप में प्रभु शिव की मूर्ति कहीं और रखी है जो कल बरात की तरह यहां पहुंचेगी तथा रस्में निभाई जाएंगी। 13 अप्रैल को विसर्जन कर दिया जाएगा। इस मौके पर विवाह शादियों जैसा आयोजन किया जाता है।
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