ऊना में मानसून को लेकर खड्डों को डी सिल्टिंग को लेकर आयोजित बैठक में मौजूद अधिकारी। संवाद
ऊना। बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने गर्मियों में व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। जिलेभर में सर्वेक्षण अभियान चलाया जाएगा ताकि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें। जिले में हर साल बरसात के समय विभिन्न स्थानाें पर जलभराव होता है।
इस संबंध में वीरवार को अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल गुर्जर ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। उपमंडल स्तर पर इस समस्या को लेकर संभावित क्षेत्रों में एक विशेष सर्वेक्षण चलाया जाएगा। इस सर्वेक्षण के माध्यम से उन खड्डों, नालों और जल निकासी मार्गों की स्थिति का आकलन किया जाएगा जहां बरसात के दौरान पानी जमा होने की आशंका रहती है।
सर्वे के बाद चिह्नित स्थानों पर खड्डों की डी-सिल्टिंग (गाद निकालने) का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि बरसात से पहले यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या को कम करना और लोगों को सुरक्षित व बेहतर सुविधा प्रदान करना है।
गाद जमा होने से पानी का बहाव बाधित होता है जिससे बारिश के समय पानी सड़कों, खेतों और घरों में घुस जाता है। लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। एडीसी ने निर्देश दिए कि निगम क्षेत्र में आने वाले सभी नालों, खड्डों और स्वां नदी की सफाई का कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि जहां वन विभाग की भूमि आती है वहां से पूर्व अनुमति ली जाए। निजी भूमि के मामलों में स्थानीय लोगों से समन्वय स्थापित किया जाए। सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ आवश्यक औपचारिकताएं समय पर पूरी कर यह कार्य मानसून से पहले पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में एसडीएम ऊना अभिषेक मित्तल, उप वन संरक्षक विकल्प यादव, संयुक्त आयुक्त नगर निगम मनोज कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।