प्रदेश के ग्राम पंचायतों को और अधिक वित्तीय शक्तियां मिल गई हैं। 14वें वित्तायोग के तहत जिले की ग्राम पंचायतों को 20.37 लाख रुपये को बजट मिला है। ग्राम पंचायतें इस बजट को अब संबंधित पंचायतों के तहत आने वाली पेयजल स्कीमों के रखरखाव और मरम्मत कार्य पर खर्च कर सकेंगी।
इससे पहले आईपीएच स्कीमों का रखरखाव आईपीएच विभाग करता आया है। अब यह जिम्मेवारी ग्राम पंचायतों को दी गई है। आईपीएच को मिलने वाली पेयजल स्कीमों के रखरखाव और मरम्मत के लिए बजट में भी लगभग 50 फीसदी की कटौती कर दी गई है।
बीते साल आईपीएच विभाग को पेयजल स्कीमों के रखरखाव के लिए सात करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन इस बार महज चार करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। अब पंचायतों को पेयजल स्कीमों के रखरखाव की जिम्मेवारी मिलने से लोगों की पेयजल दिक्कतें शीघ्र दूर होने की उम्मीद जताई है। वार्ड स्तर पर पंचायतों की पकड़ मजबूत रहती है। अगर कहीं पानी की कोई समस्या होगी तो पंचायतें आसानी से समस्या को दूर कर सकेंगी।
क्या कहते हैं अधिकारी
आईपीएच विभाग के अधीक्षण अभियंता एसके सोढी ने बताया कि पेयजल स्कीमों की मरम्मत और देखरेख का कार्य ग्राम पंचायतें करेंगी। 14वें वित्तायोग में पंचायतों के खाते में सीधे बजट जारी हुआ है। आईपीएच विभाग को इस बार बहुत कम बजट मिला है।
जिला पंचायत अधिकारी रमेश चंद कपूर ने कहा कि 14वें वित्तायोग के तहत पंचायतों अब तक 20.37 लाख रुपये को बजट मिला है। उन्होंने कहा कि इस राशि से पंचायतें पेयजल स्कीमों का रखरखाव कर सकेंगी।