हमीरपुर। कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो मुश्किलें भी रास्ता नहीं रोक पातीं। इस कहावत को पटनौण गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रोमिला कुमारी ने सच कर दिखाया है।
जिंदगी ने उन्हें एक नहीं, कई कठिन परीक्षाओं से गुजरने पर मजबूर किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। 2005 में पति के पैरालाइज होने के बाद जहां परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, वहीं प्रोमिला कुमारी ने टूटने के बजाय खुद को और मजबूत बनाया।
घर की जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को पढ़ाने का कार्य लगातार जारी रखा। आज उनके दो बेटों में से एक पीजीआई में हार्ट स्पेशलिस्ट है, जबकि दूसरा लोक निर्माण विभाग में इंजीनियर के पद पर सेवाएं दे रहा है।
करीब 28 साल पहले प्रोमिला कुमारी ने आंगनबाड़ी केंद्र में सेवाएं देना शुरू किया, तब गांव में शिक्षा को लेकर ज्यादा जागरूकता नहीं थी। छोटे बच्चों को पढ़ाने की बजाय कई परिवार उन्हें घर के कामों में लगाना बेहतर समझते थे। ऐसे समय में प्रोमिला ने घर-घर जाकर अभिभावकों को समझाया कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा कितनी जरूरी है।
वह बच्चों को खुद केंद्र तक लेकर आती थीं। धीरे-धीरे केंद्र में बच्चों की संख्या बढ़ने लगी और गांव में शिक्षा का माहौल बनने लगा। उन्होंने अपने दोनों बेटों को भी केंद्र में पढ़ाकर प्रारंभिक शिक्षा दी, जिसकी बदौलत दोनों उच्च पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। संवाद