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जीवित रहे तो एनपीएस, बीच सेवा में मरे तो ओपीएस

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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश राजकीय टीजीटी आर्ट्स संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2003 से पूर्व नियुक्त अनुबंध, तदर्थ और अन्य कुछ श्रेणियों के शिक्षकों को वीना देवी बनाम सरकार मामले के निर्णय की तर्ज पर पेंशन लाभ नहीं मिला है। वर्ष 2003 के बाद पुरानी पेंशन लाभ देने के लिए भी कार्रवाई अपेक्षित है।
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संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कौशल, उपाध्यक्ष मदन, प्रदेश महासचिव विजय हीर, स्टेट प्रतिनिधि संजय ठाकुर, देश राज, संघ प्रचारक ओम प्रकाश, प्रेस सचिव पवन रांगड़ा तथा जिला इकाइयों के प्रधानों ने कहा कि संघ ने केंद्र सरकार की 3 जून, 2021 को सेवारत कर्मचारियों की सेवा के दौरान हुई मृत्यु पर पुरानी पेंशन, ग्रेच्युटी, एक माह में पीपीओ नंबर देकर बैंक में पेंशन अदायगी की अधिसूचना को कोविड परिस्थितियों के अनुसार सही कदम बताया। मगर सब कर्मचारी पुरानी पेंशन स्कीम के लिए मर नहीं सकते। जीवित कर्मचारियों के लिए भी प्रावधान बनाना आवश्यक है।
नई पेंशन स्कीम धारक कर्मचारियों को अगर पुरानी पेंशन योजना के लाभ चाहिए तो ये उनको उस दशा में मिलेंगे, जब बीच सेवा के दौरान उनकी मृत्यु हो जाए। केंद्र सरकार की ओर से इस बारे में जारी अधिसूचना में साफ लिखा गया है कि जनवरी 2020 से न्यू पेंशन स्कीम के कर्मचारियों की मृत्यु होने पर आश्रित पति/पत्नी को शुरुआती दस वर्ष में अंतिम वेतन की आधी राशि पेंशन रूप में मिलेगी और उसके बाद अंतिम वेतन की 30 फीसदी राशि आजीवन पेंशन रूप में मिलेगी और आश्रित पुत्र/पुत्री को नौकरी देने का प्रयास होगा।
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वर्ष 2003 के बाद नई पेंशन योजना के अधीन नियुक्त कर्मचारियों को 2009 में केंद्र सरकार की ओर से पेंशन संबंधी अधिसूचना का लाभ राज्य कर्मचारियों को नहीं मिल रहा है। इसी प्रकार वर्ष 2009 की अधिसूचना भी है। जहां इस अधिसूचना के तहत एनपीएस कर्मचारी की सेवा के दौरान मौत या उसके अपंग होने पर परिवार या कर्मचारी को पुरानी पेंशन के तहत पेंशन लाभ प्रदान किए जाते हैं, इसी तरह पुरानी पेंशन लाभ के लिए मरने की कसौटी तर्कहीन है और इस अधिसूचना का भी लाभ प्रदेश में प्रतीक्षित है।
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