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अब सीधे मिड-डे मील वर्करों के बैंक खातों में जाएगी मासिक मानदेय की राशि

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हमीरपुर। सूबे के मिड-डे मील वर्करों को अब नकद नहीं, बल्कि ऑनलाइन डिजिटल भुगतान होगा। शिक्षा विभाग ने इसके लिए पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) सॉफ्टवेयर तैयार किया है। प्रदेशभर के स्कूलों में खाना पकाने वाले मिड-डे मील वर्करों की बैंक डिटेल लेकर इसे सॉफ्टवेयर के साथ लिंक किया जा रहा है। अब सीधे मिड-डे-मील वर्करों के खाते में मासिक मानदेय की राशि आएगी। जबकि इससे पूर्व मिड-डे मील वर्करों को नकद भुगतान किया जाता था। ऑनलाइन भुगतान से समय और श्रम शक्ति की बचत होगी।
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मिड-डे मील वर्करों को प्रतिमाह 2600 रुपये मासिक मानदेय मिलता है। जिस स्कूल में 25 विद्यार्थी हैं, वहां पर एक मिड-डे मील वर्कर, जबकि जिस स्कूल में 25 से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, वहां पर दो-दो मिड-डे मील वर्करों की नियुक्तियां की गई हैं। पीएफएमएस सिस्टम से मिड-डे मील वर्करों को भुगतान से कई फायदे हैं। अगर कोई मिड-डे-मील वर्कर अपने मानदेय के बैंक खाते से इंश्योरेंस स्कीम का लाभ उठाना चाहता है तो बैंक में बहुत कम प्रीमियम देकर दुर्घटना और मेडिकल इंश्योरेंस का लाभ भी उठा सकते हैं। 2 मार्च से प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील पकाने और परोसने के निर्देश जारी हुए हैं। प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में सैकड़ों मिड-डे मील वर्कर हैं। अकेले जिला हमीरपुर के विभिन्न स्कूलों में ही कुल 1122 मिड-डे मील वर्कर सेवाएं दे रहे हैं।
चार माह से रुका हुआ मानदेय भी मिड-डे-मील वर्करों को इस सप्ताह मिलेगा
हमीरपुर। मिड-डे मील वर्करों का पिछले चार माह से मानदेय का भुगतान नहीं हो पाया है। अब सरकार ने इनके मानदेय के लिए बजट जारी कर दिया है। हमीरपुर जिले के लिए सरकार नेे 2.32 करोड़ रुपये बजट जारी किया है। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (बीपीईओ) से शिक्षा विभाग ने मिड-डे मील वर्करों की बैंक डिटेल मांगी है। इसी सप्ताह सभी वर्करों को उनका बकाया मानदेय मिलेगा। मिड-डे मील वर्करों को खाना पकाते समय चूड़ियां और अंगूठी इत्यादि न पहनने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि कोरोना संक्रमण से बचा जा सके।
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मिड-डे मील वर्करों के मानदेय के लिए सरकार से 2.32 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ है। जिला में कुल 1122 मिड-डे-मील वर्कर सेवाएं दे रहे हैं। 2 मार्च से सभी स्कूलों में मिड-डे मील पकाने और परोसने के निर्देश जारी हुए हैं।
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-संजय ठाकुर, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग हमीरपुर।
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