हमीरपुर। जिला हमीरपुर में अब बकरियों का भी कृत्रिम गर्भाधान (आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन) शुरू होने जा रहा है। इस तकनीक के तहत बकरियों के लिए बीटल और बरबरी नस्ल के बकरों का सीमन 16 पशु अस्पतालों में उपलब्ध करवाया गया है। बकरी प्रजनन केंद्र ताल में भी बीटल नस्ल का सीमन उपलब्ध है।
एक बकरी के कृत्रिम गर्भाधान पर 25 रुपये का खर्च आएगा। बीटल और बरबरी नस्ल की बकरियां दूध और मांस उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं। कृत्रिम गर्भाधान से अच्छे नस्ल के मेमने पैदा होंगे, जिससे पशुपालकों की आय में भी वृद्धि होगी। बकरी पालन एक अच्छा व्यवसाय है। बकरियों के कृत्रिम गर्भाधान के लिए पशुपालक पशु चिकित्सालय से मदद ले सकते हैं।
बकरी प्रजनन केंद्र ताल के सहायक निदेशक संजीव कालिया ने कहा कि बकरी पालन एक अच्छा व्यवसाय है। अन्य जिलों की भांति हमीरपुर में भी बकरियों का कृत्रिम गर्भाधान करवाया जा सकेगा। जिला के 16 पशु अस्पतालों के साथ-साथ बकरी प्रजनन केंद्र ताल में भी सीमन उपलब्ध करवाया जा चुका है। इससे अच्छी नस्ल की बकरियां पैदा होंगी।
बकरी पालन को एक लाभदायक व्यवसाय बताते हुए संजीव कालिया ने कहा कि कृत्रिम गर्भाधान तकनीक से नस्ल सुधार संभव है और यह पूरी तरह से सुरक्षित है। इस प्रक्रिया से जन्म लेने वाले मेमनों में नस्ल संबंधी कोई समस्या या बीमारी नहीं आएगी, जिससे पशुपालकों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
यह है कृत्रिम गर्भाधान की प्रक्रिया
आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान की ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें मादा पशु को स्वाभाविक रूप से गर्भित करने के स्थान पर कृत्रिम विधि से गर्भित करवाया जाता है। इस प्रयोग से पशुओं की नस्ल में सुधार आता है। कृत्रिम विधि में प्रयोग के लिए अच्छी नस्ल के नर पशु का ही उपयोग किया जाता है। ऐसे में जन्म लेने वाले बच्चे में नस्ल के कारण कोई परेशानी, कमजोरी या बीमारी नहीं आती।