हमीरपुर। किसी भी फसल की पैदावार खेत की मिट्टी पर निर्भर करती है। फसलों के उत्पादन के लिए जरूरी तत्वों में जरा भी संतुलन बिगड़ने पर पैदावार कम हो जाती है।
फिर चाहे कितना भी अच्छा बीज डालें, किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। फसलों के लिए सबसे अहम पोषक तत्व नाइट्रोजन है, लेकिन मिट्टी के सैंपल की जांच में जिले के कुछ क्षेत्रों की मिट्टी में नाइट्रोजन का स्तर कम पाया गया है, जबकि अधिकतर क्षेत्रों में नाइट्रोजन का स्तर मध्यम पाया गया है। नाइट्रोजन का मध्यम स्तर बेहतर फसल के लिए उपयुक्त माना जाता है। कृषि विभाग की ओर से मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत जिला के विभिन्न क्षेत्रों से 2775 मिट्टी के सैंपल की जांच की जा रही है।
अधिकतर सैंपल की जांच हो चुकी है, जिन्हें संबंधित किसानों तक पहुंचाया जा चुका है। अभी तक हुई जांच में यह सामने आया है कि करीब सात प्रतिशत मिट्टी के सैंपल में नाइट्रोजन का स्तर कम पाया गया है। कम स्तर होने के चलते पत्ते पीले पड़ जाते हैं। फसल की ग्रोथ कम होती है। हालांकि इस कमी को पूरा करने के लिए संबंधित किसानों को उपाय बताए गए हैं, ताकि फसल का उत्पादन प्रभावित न हो।
फसल को प्रोटीन देता है नाइट्रोजन
नाइट्रोजन का प्रमुख कार्य मिट्टी में से फसल को प्रोटीन देना है। पौधों की वृद्धि एवं विकास में इसका योगदान होता है। यह पौधों को गहरा हरा रंग प्रदान करता है। वानस्पतिक वृद्धि को बढ़ावा मिलता है। अनाज और चारे वाली फसलों में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाता है। दाने बनने में मदद करता है।
कोट
कृषि विभाग हमीरपुर के उपनिदेशक शशिपाल ने कहा कि अधिकतर मिट्टी के सैंपल की जांच की जा चुकी है। कुल 2775 मिट्टी के सैंपल लिए गए थे। जिला की मिट्टी पोषक तत्वों से भरपूर है। हालांकि जिन पोषक तत्वों की कमी दिखती है, उस कमी को पूरा करने के लिए सलाह सहित उपाय के बारे में जानकारी किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से दी जाती है।