हमीरपुर। प्राकृतिक खेती वर्तमान समय की आवश्यकता है, क्योंकि रासायनिक खादों और कीटनाशक दवाइयों के उपयोग के कारण खाद्यान्न जहरीले हो गए हैं। इससे लोगों में अनेक लाइलाज बीमारियां पैदा हो रही हैं। प्राकृतिक खेती में लागत कम है और सेहत के लिए भी फायदेमंद है। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण के माध्यम से शून्य लागत प्राकृतिक खेती पर गसोता में किसान गोष्ठी और प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को संबोधित करते हुए आत्मा परियोजना निदेशक डॉ. कुलदीप वर्मा ने बताया कि शून्य लागत प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को सरकार की ओर से देसी गाय खरीदने के लिए 25 हजार रुपये अधिकतम या 50 फीसदी, गोशाला का फर्श और गो मूत्र इकट्ठा करने के लिए 8 हजार तथा गोमूत्र स्टोरेज ड्रम संग्रहण के लिए अधिकतम 2250 रुपये का अनुदान प्रदान किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि किसानों के आर्थिक स्तर को बेहतर बनाने तथा स्वच्छ उत्पादों के लिए प्रदेश सरकार की ओर से भी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान नामक योजना आरंभ की गई है। जिले में वर्तमान समय में करीब एक हजार किसान इस योजना से जुड़ चुके हैं और वर्ष 2020 तक विभाग की ओर से करीब चार हजार से अधिक किसानों को इस पद्धति से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। गोष्ठी में जिले के सभी विकास खंडों से आए 300 किसानों को प्राकृतिक खेती के गुर सिखाए गए। उन्होंने कहा कि किसानों को अपना तथा आने वाली पीढ़ियों का स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए इसे अपनाना ही होगा। इसी पद्धति से किसानों की आय 2022 तक दोगुना करने का प्रधानमंत्री का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है। इस अवसर पर एपीएमसी के अध्यक्ष अजय शर्मा, प्रधान ग्राम पंचायत नाल्टी ज्योति प्रकाश शर्मा तथा विशाल पठानिया विशेष रूप से उपस्थित रहे।