कमलेश रतन भारद्वाज
हमीरपुर। म्यांमार में साइबर स्लेवरी में फंसे 30 से अधिक लोगों को बीते 20 दिनों में हिमाचल वापस लाया गया है। 19 नवंबर को 15 और लोगों को सुरक्षित वापस लाया गया है। इन लोगों को थाईलैंड में नौकरी देने के बहाने म्यांमार में संचालित साइबर फ्राड सेंटर में जबरन रखा गया था।
म्यांमार में संचालित साइबर फ्राड सेंटर के ऑपरेटरों के हिमाचल के कुछ लोगों के लिंक भी प्रारंभिक जांच में पाए गए हैं। ऐसे में अब इन मामले में हिमाचल पुलिस कार्रवाई कर सकती है। ये लोग पुलिस की रडार पर है। इस मामले में हिमाचल पुलिस की साइबर विंग जांच में जुटी है। संभावना है कि जल्द ही हिमाचल की साइबर पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज करेगी।
हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर इस मामले की जांच में केंद्रीय जांच एजेंसियां भी जुटी हैं। देशभर के सैकड़ों युवाओं को म्यांमार से सैन्य ऑपरेशन के जरिये वायु सेना के विमानों में वापस लाया गया है। वापस लाए गए लोगों से दिल्ली में केंद्रीय जांच एजेंसियों ने पूछताछ की है। इस दौरान अधिकतर पीड़ितों ने यह खुलासा किया है।
वह एजेंटों के जरिये थाइलैंड में नौकरी करने भेजे गए थे, लेकिन बाद में उन्हें साइबर स्लेवरी में झोंक दिया गया। म्यांमार में साइबर फ्राड सेंटर में इनसे जबरन फ्राड कॉल करवाई गई और लोगों को ठगने का कार्य करवाया गया। जब उन्होंने वहां से निकलना चाहा तो उन्हें प्रताड़ित किया गया।
पूरे प्रदेश में फैला जाल, एक महिला भी सुरक्षित वापस लाई
म्यांमार से वापस लाए गए हिमाचल के 30 से अधिक लोगों में एक महिला भी शामिल है। लोगों की वापसी का सिलसिला तीन नवंबर से जारी है। आखिरी दफा 19 नवंबर को 15 लोगों को वापस लाया गया है। जांच एजेंसियों की पूछताछ के बाद पिछले कल ही यह लोग घर पहुंचे है। इन लोगों के फोन और अन्य इलेक्ट्राॅनिक्स डिवाइस की जांच भी की गई है।
म्यांमार साइबर स्लेवरी मामले में अब तक 30 से अधिक लोगों को सुरक्षित हिमाचल लाया गया है। पीड़ितों को पूछताछ के बाद घर भेज दिया गया है। मामले में जांच की जा रही है।
-रोहित मालपाणी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, साइबर अपराध, हिमाचल पुलिस