रंगस (हमीरपुर)। अगस्त 2025 में हुए भूस्खलन ने गांव खिलां की करीब 250 कनाल कृषि भूमि को तबाह कर दिया था, लेकिन एक वर्ष बाद भी प्रभावित किसानों को राहत नहीं मिल सकी है। लगातार बढ़ रहे कटाव और गहरी दरारों के बीच ग्रामीणों को अब रिहायशी क्षेत्रों तक खतरा पहुंचने की चिंता सता रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों के दावे फाइलों तक सीमित होकर रह गए हैं। बरसात का मौसम फिर शुरू हो चुका है और लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो भूस्खलन का खतरा खेतों से आगे बढ़कर रिहायशी क्षेत्र तक पहुंच सकता है। इस आपदा से गांव के 10 से अधिक परिवार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं।
भारी बारिश के दौरान हुए भूस्खलन के बाद से प्रभावित क्षेत्र में लगातार कटाव बढ़ रहा है। कई स्थानों पर जमीन में चौड़ी दरारें पड़ चुकी हैं और ढलान लगातार कमजोर होती जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार हर बारिश के साथ जमीन और खिसक रही है, जिससे बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीणों ने बताया कि घटना के तुरंत बाद पंचायत प्रतिनिधियों और प्रशासन को इसकी सूचना दे दी गई थी, लेकिन शुरुआती महीनों में मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। मार्च 2026 में तत्कालीन एसडीएम नादौन निशांत शर्मा के संज्ञान में मामला आने पर कृषि, भूसंरक्षण और राजस्व विभाग से रिपोर्ट तलब की गई।
19 मार्च को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्ष एवं उपायुक्त हमीरपुर से तकनीकी टीम भेजकर निरीक्षण करवाने का आग्रह भी किया गया। इसके बावजूद मामला विभागीय पत्राचार तक ही सीमित रहा और मौके पर कोई स्थायी सुरक्षा कार्य शुरू नहीं हो सका।
उपायुक्त द्वारा लोक निर्माण विभाग को तकनीकी निरीक्षण के निर्देश भी दिए गए, लेकिन पंचायत चुनावों की तैयारियों के बीच मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया। स्थिति यह है कि एक वर्ष बाद भी न तो तकनीकी सर्वेक्षण पूरा हो पाया है और न ही ढलान को सुरक्षित करने या कटाव रोकने के लिए कोई संरक्षण कार्य शुरू किया गया है।
सीएम सुक्खू के गृह क्षेत्र के लोग परेशान
ग्रामीणों का कहना है कि जब मुख्यमंत्री के गृह विधानसभा क्षेत्र में ही भूस्खलन प्रभावित किसानों को एक वर्ष बाद भी राहत और सुरक्षा कार्यों का इंतजार है, तो दूरदराज के क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। बरसात शुरू होने से प्रभावित परिवारों की चिंता फिर बढ़ गई है। उनका आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में निरीक्षण और निर्देश दर्ज हैं, लेकिन मौके पर कोई ठोस कार्य नहीं हुआ। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो इस बार नुकसान और अधिक हो सकता है।
कोट्स
जिले में पूर्व में भी भूमि धंसने के मामले सामने आए हैं। प्रभावित क्षेत्र के तकनीकी सर्वेक्षण के लिए सरकार को लिखा है। गांव खिलां के मामले में अधिशासी अभियंता से प्रारंभिक निरीक्षण रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मामले को सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा।
-नरेश पटियाल, जिला राजस्व अधिकारी, हमीरपुर
भूस्खलन को एक साल होने वाला है, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया। हर बारिश में डर लगा रहता है कि कहीं और जमीन न धंस जाए।
-नितिन, ग्रामीण
प्रशासन और विभागों के अधिकारी केवल आश्वासन दे रहे हैं। मौके पर कोई सुरक्षा कार्य शुरू नहीं हुआ है, जिससे लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है।
-रीता देवी, ग्रामीण
खेती योग्य जमीन पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। नुकसान का आकलन तो हुआ है, लेकिन राहत और संरक्षण कार्य अभी तक शुरू नहीं किए गए हैं।
-आशा देवी, ग्रामीण
बरसात फिर शुरू होने वाली है और भूस्खलन का खतरा पहले से ज्यादा बढ़ गया है। प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार नहीं करना चाहिए।
-पवना कुमारी, ग्रामीण
खिलां गांव में भू-स्खलन के कारण धंसी भूमि को दिखाते ग्रामीण। संवाद
खिलां गांव में भू-स्खलन के कारण धंसी भूमि को दिखाते ग्रामीण। संवाद
खिलां गांव में भू-स्खलन के कारण धंसी भूमि को दिखाते ग्रामीण। संवाद
खिलां गांव में भू-स्खलन के कारण धंसी भूमि को दिखाते ग्रामीण। संवाद