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भोरंज अस्पताल में लैब तकनीशियन की कमी

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भोरंज (हमीरपुर)। सिविल अस्पताल भोरंज स्वास्थ्य सुविधाओं में पिछड़ रहा है। भोरंज अस्पताल में दो लैब तकनीशियन हैं। इन्हें सिलसिलेवार प्रतिनियुक्ति पर 65 किलोमीटर दूर गलोड़ भेजा जा रहा है। अस्पताल में रोजाना 300 से अधिक ओपीडी हैं। स्त्री रोग, हड्डी रोग, शिशु रोग, मेडिसिन, ईएनटी विशेषज्ञ मरीजों के कई प्रकार के टेस्ट लिखते हैं। लेकिन लैब तकनीशियन न होने पर उन्हें निजी अस्पताल में तीन गुणा अधिक दामों पर टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं।
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गलोड़ के नजदीकी अस्पताल मेडिकल कॉलेज हमीरपुर, सिविल अस्पताल नादौन और बड़सर से भी यहां लैब तकनीशियन को प्रतिनियुक्ति पर लगाया जा सकता है। लेकिन भोरंज की 39 पंचायतों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने वाले एकमात्र सिविल अस्पताल भोरंज से 65 किलोमीटर दूर कर्मचारी भेजा जा रहा है। वहीं, अस्पताल में पांच माह से एक्सरे की सुविधा बंद है। अस्पताल में कभी मशीनें खराब रहती हैं तो कभी तकनीशियन नहीं होते हैं। क्षेत्र के लोगों राजीव, रजनीश, व्यापार मंडल प्रधान सुभाष ठाकुर, अमन सोनी, अश्वनी, अश्वनी ठाकुर, रणजीत सिंह, मुकेश, धर्म चंद मोनिका ने कहा है कि रेडियोलॉजिस्ट न होने से उन्हें निजी लैबों में एक्सरे करवाने पड़ रहे हैं। वहीं, टेस्ट करवाने के लिए भी घंटों इंतजार करना पड़ रहा है या निजी लैबों में जाना पड़ रहा है। उधर, बीएमओ भोरंज डॉ. ललित कालिया नेे कहा कि भोरंज अस्पताल में दो लैब तकनीशियन हैं। उनमें से कभी एक तो कभी दूसरे को डेपुटेशन पर गलोड़ अस्पताल में भेजा जा रहा है। इससे भोरंज अस्पताल में लोगों को कोरोना टेस्ट और अन्य टेस्ट करवाने में परेशानी हो रही है। भोरंज अस्पताल में डेपुटेशन पर रेडियोलॉजिस्ट आता है, लेकिन स्थायी सुविधा नहीं है।
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