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राजा परीक्षित की मौत के बाद से हुई कलयुग की शुरुआत : ओम प्रकाश

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डिडवीं टिक्कर(हमीरपुर)। डिडवीं पंचायत में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास आचार्य ओम प्रकाश ने कौरव पांडव और राजा परिक्षित के जन्म का वृतांत सुनाया। उन्होंने कहा कि द्वापर युग में परीक्षित नाम के एक राजा थे, जो बहुत ही न्याय प्रिय और अपनी प्रजा के प्रति निष्ठावान थे।
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राजा परीक्षित धनुर्धर अर्जुन के पौत्र और वीर अभिमन्यु के पुत्र थे। वे एक बार जंगल में शिकार करने गए, जहां उन्होंने शमीक ऋषि मौन अवस्था में ध्यान कर रहे थे। परीक्षित, शमीक ऋषि से पीने के लिए पानी मांगते हैं, लेकिन ऋषि ध्यान में थे, इसलिए वे राजा की बात का कोई उत्तर नहीं देते। राजा परीक्षित गुस्से के कारण ऋषि के गले में मरा हुआ सांप डाल देते हैं। जब शमीक ऋषि के पुत्र शृंगी ऋषि को इस बात का पता लगता है तो वे क्रोध में आकर राजा परीक्षित को श्राप दे देते हैं कि सात दिन में नाग राज तक्षक उन्हें डस लेगा और उनकी मृत्यु हो जाएगी। श्राप के कारण राजा को सात दिन के बाद नाराराज तक्षक ने डस लिया और उनकी मृत्यु हो गई। राजा परीक्षित की मृत्यु के बाद से ही कलयुग की शुरुआत होती है।
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