हमीरपुर। प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में संचालित बैचलर ऑफ वोकेशन (बीवाक) कार्यक्रम को सेल्फ-फाइनेंस मोड में किए जाने के प्रस्ताव के बीच इससे जुड़े करीब 180 कर्मचारियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।
बीवॉक एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप कर कार्यक्रम के लिए केंद्रीय स्तर पर स्थायी वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने की मांग की है। प्रदेश बीवाक एसोसिएशन के पैनल एडवाइजर अनिल शर्मा, राजीव चौहान, सुनील राणा ने कहा कि बीवाक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कार्यक्रम है।
इसे सेल्फ-फाइनांस मोड में ले जाने के बजाय केंद्र सरकार को इसकी फंडिंग व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण कौशल शिक्षा मिलती रहे और कर्मचारियों का भविष्य भी सुरक्षित हो सके।
एसोसिएशन का कहना है कि बीवॉक को सेल्फ-फाइनेंस मोड में संचालित करने से फीस बढ़ सकती है, जिसका सीधा आर्थिक भार विद्यार्थियों और अभिभावकों पर पड़ेगा। इसका असर विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों पर पड़ने की आशंका है।
फीस बढ़ने से कई विद्यार्थी कौशल आधारित उच्च शिक्षा से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि बीवाक कार्यक्रम करीब नौ वर्षों से सरकारी महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा दे रहा है।
वर्तमान में फंड लंबित होने से कर्मचारियों के सामने वेतन का संकट पैदा हो गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि सत्र 2026-27 की लंबित फंडिंग जल्द जारी करने के साथ कार्यक्रम के लिए स्थायी केंद्रीय वित्तीय व्यवस्था की जाए।
उन्होंने मांग की है कि सत्र 2026-27 की लंबित फंडिंग तत्काल जारी करने, करीब 180 कर्मचारियों के वेतन संबंधी समस्या का समाधान करने, बीवॉक के लिए स्थायी केंद्रीय फंडिंग व्यवस्था बनाने और इसे सेल्फ-फाइनेंस मोड में संचालित करने के प्रस्ताव की समीक्षा की जाए।