हमीरपुर। कृषि सहकारी सभा संगरोह में ऑडिट पैरा में खामियों की प्रारंभिक विभागीय जांच में फर्जी ऋण आवंटन के खुलासों पर जांच एजेंसियों और सरकार की मंशा सवालों में है। प्रारंभिक खुलासों के बाद जांच सरकारी फाइलों में दम तोड़ती दिख रही है। इस सभा के निवेशक की ओर से भोरंज थाना में एफआईआर दर्ज करवाई गई है।
निवेशक ने जमा पूंजी को वापस न करने के आरोप सभा पर लगाए हैं जबकि विभागीय जांच में फर्जी ऋण आवंटन का खुलासा होने के बाद पुलिस को इस मामले में विभाग की ओर से जांच के लिए पत्राचार किया गया है। लंबे समय से इस सभा के सैकड़ों निवेशक विभागीय जांच के पूरा होने का इंतजार कर रहे थे। हिमाचल प्रदेश सहकारी सभाएं अधिनियम 1969 की धारा 69 (1) के तहत इस जांच को किया गया था।
प्रांरभिक जांच में फर्जी ऋण आवंटन और अन्य गड़बड़ियों का खुलासा होने के बाद सहकारिता विभाग हमीरपुर की ओर से मार्च और अप्रैल माह में जिला पुलिस को इस विषय पर जांच रिपोर्ट सहित पत्राचार किया गया लेकिन जांच एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सकी है। पहले विभागीय जांच में काफी लेटलतीफी हुई थी। हालांकि विभाग का तर्क था कि संबंधित सहकारी सभा की कमेटी और सचिव जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
विभाग और सभा कमेटी के तर्क वितर्क के बीच किसी तरह से जांच पूरी हुई लेकिन विभागीय जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही है। जांच रिपोर्ट को विभाग ने पुलिस महकमे के साथ साझा किया है लेकिन पुलिस की जांच करीब डेढ़ माह बाद भी जस की तस है। ऐसे में सरकारी तंत्र पर सवाल उठना लाजिमी है।