हमीरपुर। फैमिली कोर्ट हमीरपुर ने पत्नी को दिए जाने वाले मासिक गुजारा भत्ते को रद्द या कम करने की मांग को लेकर दायर पति की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल दावों के आधार पर गुजारा भत्ते में बदलाव नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता पति ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 146 के तहत आवेदन दायर कर 26 सितंबर 2024 को पारित आदेश में संशोधन या उसे रद्द करने की मांग की थी। इस आदेश में उसे पत्नी को हर महीने 20,000 रुपये गुजारा भत्ता देने के निर्देश दिए गए थे।
पति ने तर्क दिया था कि उसकी नौकरी छूट गई है और अब उसे 1.87 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन नहीं मिल रहा है। उसने यह भी दावा किया था कि वह एफडी से मिलने वाले ब्याज पर निर्भर है और उसकी पत्नी उससे अधिक आय अर्जित कर रही है।
प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट हमीरपुर पंकज शर्मा की अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि पति नौकरी छूटने या आय में कमी से संबंधित कोई ठोस दस्तावेजी प्रमाण, जैसे टर्मिनेशन लेटर, रिलीविंग लेटर या बैंक स्टेटमेंट पेश नहीं कर सका।
अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में गुजारा भत्ता कम करने या रद्द करने से इनकार करते हुए 26 सितंबर 2024 के आदेश को यथावत रखने का फैसला सुनाया।