हमीरपुर। सत्र न्यायाधीश पंकज शर्मा की अदालत ने घरेलू हिंसा मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (एसीजेएम) नादौन के आदेश के खिलाफ दायर पति की अपील को खारिज कर दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सक्षम पति की ओर से पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण और पढ़ाई का खर्च न देना आर्थिक क्रूरता के दायरे में आता है। मामले के अनुसार, पीड़िता महिला की शादी 27 अप्रैल 2003 को नादौन क्षेत्र के एक व्यक्ति से हुई थी।
शादी के बाद दंपती की दो बेटियां हैं। पीड़िता ने घरेलू हिंसा अधिनियम-2005 की धारा 12 के तहत एसीजेएम नादौन की अदालत में याचिका दायर की थी।
ट्रायल कोर्ट ने 22 मई 2024 को पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पति को 7,000 रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता और 2,000 रुपये प्रतिमाह मकान किराया देने के निर्देश दिए थे। इस आदेश को चुनौती देते हुए पति ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।
पति ने दावा किया था कि वह बद्दी में नौकरी छोड़ चुका है और गांव में बढ़ई की दुकान पर काम कर केवल 5,000 रुपये प्रतिमाह कमाता है। उसने यह भी दलील दी थी कि पत्नी निजी स्कूल में शिक्षिका है और आत्मनिर्भर है, इसलिए वह भरण-पोषण की हकदार नहीं है।
सत्र न्यायाधीश पंकज शर्मा ने सुनवाई के दौरान पाया कि पति अपनी वास्तविक आय छिपा रहा है और कम आय के दावे के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सका। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए पति की अपील खारिज कर दी।
17 जुलाई को दिए फैसले में सत्र न्यायालय ने भरण-पोषण और मकान के किराये से संबंधित निचली अदालत के आदेश को पूरी तरह बरकरार रखा है।