मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो को सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के दायरे से बाहर कर दिया है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता की ओर से वीरवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य सरकार ने आरटीआई एक्ट की धारा 24(4) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए यह कदम उठाया है।
इस फैसले के बाद अब विजिलेंस ब्यूरो से सूचना नहीं मांग सकेंगे। राज्य सरकार ने जांच की गोपनीयता, सुरक्षा और खुफिया तंत्र की संवेदनशीलता एवं प्रशासनिक कार्यकुशलता के आधार पर विजिलेंस को आरटीआई के दायरे से बाहर रखने का निर्णय लिया है। बताया गया है कि अधिनियम की धारा 24 के तहत केंद्र और राज्य सरकारों को सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को इस कानून से छूट देने का अधिकार है। केंद्र स्तर पर सीबीआई, आईबी, रॉ, ईडी और एनएसजी जैसी 20 से अधिक एजेंसियां इस दायरे से बाहर हैं। हालांकि, कई राज्यों में विजिलेंस ब्यूरो को पूरी तरह आरटीआई के दायरे से बाहर करने पर विवाद रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की जांच से जुड़ा विभाग होता है।
यूपी-हरियाणा में भी जांच एजेंसियां दायरे से बाहर
पड़ोसी राज्य हरियाणा, यूपी और तमिलनाडु में भी खुफिया या विशेष जांच एजेंसियों को आरटीआई के दायरे से बाहर रखा गया है। एजेंसियों को आरटीआई से बाहर रखने के पीछे तर्क दिया जाता है कि जांच में कोई आरोपी आरटीआई से विभाग की केस फाइल या नोटिंग तक पहुंच बना ले तो सबूतों को मिटा सकता है और जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।