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बढ़ा हुआ बस किराया आज से वसूला जाएगा, यात्रियों में आक्रोश

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हमीरपुर। निजी बसें तो चल पड़ी हैं, लेकिन किराया अधिक होने से अधिकतर लोग इनमें सफर करने से परहेज कर रहे हैं। लोग बस किराये में की गई वृद्धि का विरोध कर रहे हैं। वीरवार को इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई है, इससे लोगों में आक्रोश है। जिले में करीब 70 निजी बसें रूटों पर चल रही हैं। हालांकि वीरवार तक तो निजी बस ऑपरेटर पुराना ही किराया वसूल रहे थे, लेकिन अब अधिसूचना जारी होने के बाद शुक्रवार 24 जुलाई से बढ़ा हुआ किराया लेंगे।
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उधर, ऑपरेटरों की माने तो अभी जेब से ही तेल व अन्य खर्च देना पड़ रहा है। कमाई नहीं हो रही है और सवारियां भी कम ही मिल रही हैं। निजी बस ऑपरेटर संघ हमीरपुर के उपाध्यक्ष विजय ठाकुर ने कहा कि सवारियां कम मिल रही हैं। इन्होंने मांग की है कि टैक्स समेत अड्डा प्रवेश शुल्क भी माफ किए जाएं। वीरवार को अधिसूचना जारी हुई है, शुक्रवार से बढ़ा हुआ किराया लिया जाएगा।
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आर्थिक बोझ बढ़ गया : विजय
विजय कुमार का कहना है कि वह रोजाना बसों में सफर करते हैं। किराया बढ़ने से आर्थिक बोझ और बड़ गया है। सरकार ने इसकी अधिसूचना अगर जारी कर दी है तो यह गलत है। सरकार को गरीब तपके को ध्यान में रखकर निर्णय वापस लेना चाहिए।
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एक माह की सब्जी के रुपये लगेंगे किराये में : राकेश
राकेश कुमार का कहना है कि कोरोना काल में वैसे ही आमदन के कम साधन बचे हैं। ऐसे में अगर रोजाना 20 रुपये भी अधिक किराया देेंगे तो माह में एक माह की सब्जी तक के पैसे अतिरिक्त किराये में चुका देंगे। किराया बढ़ने से लोगों को परेशानी होगी।
तेल के दाम में करनी चाहिए थी कटौती : राजकुमार
राजकुमार का कहना है कि सरकार को किराया बढ़ाने की बजाय तेल के दामों में कटौती करनी चाहिए थी और अन्य टैक्सों में बस संचालकों को राहत देनी थी। किराया वृद्धि से अमीर तपके को कोई फर्क नहीं है। एक बार फिर गरीब तपके के लोग ही इसके बोझ तले दबे हैं।
कार्ड बनाकर सरकारी बस में सफर को तवज्जो : संजय
संजय का कहना है कि हालांकि अब बस सुविधा तो समय पर मिल रही है, लेकिन निजी बसों में सरकारी बसों से अधिक किराया लग रहा है। सरकारी बसों में लोग विभिन्न कार्ड बनाकर किराये में छूट पाकर सफर करने को तवज्जो दे रहे हैं।
निजी परिचालक नहीं दे रहे किराये में छूट : कमल
कमल कुमार ने कहा कि अब तो निजी बस परिचालक पहले की तरह किराये में छूट भी नहीं दे रहे हैं। पहले ऐसा होता था कि अगर किसी निजी बस में रोजाना सफर करें तो परिचालक पांच से दस रुपये की छूट दे देता था लेकिन, अब पूरा किराया लग रहा है।
विधायक नहीं करते बसों में सफर : यश
यश चौहान ने कहा कि सरकार विधायकों को बसों का किराया लगाने का फैसला न लेकर गरीबों के किराये को कम करने की सोचती तो अच्छा होता। विधायक बसों में कभी सफर नहीं करते। अगर इक्का दुक्का ने कभी बस में सफर किया भी हो तो वह भी महज दिखावे के लिए होता है।
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