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ग्रामीण रोजगार सेवकों को तीन माह से वेतन नहीं

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संवाद न्यूज एजेंसी
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हमीरपुर। सूबे की ग्राम पंचायतों में सेवाएं दे रहे ग्रामीण रोजगार सेवकों को करीब तीन माह से वेतन नहीं मिला है। बिना वेतन परिवार के पालन-पोषण की चिंता सताने लगी है। कई रोजगार सेवक दूसरों से उधार लेकर बच्चों की पढ़ाई और परिवार का पालन पोषण का खर्च उठा रहे हैं। रोजगार सेवकों को नवंबर माह के वेतन का ही भुगतान हुआ था, उसके बाद उन्हें कोई पैसा नहीं मिला है।
बता दें कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत सूबे की पंचायतों में चल रहे कार्य के सुचारू संचालन के लिए सरकार ने कुछ साल पहले ग्रामीण रोजगार सेवकों की नियुक्तियां की थीं। पूरे प्रदेश में ग्रामीण रोजगार सेवकों की संख्या 1070 के करीब है। पंचायत के विकास कार्यों में इनका अहम योगदान है। इसके बावजूद इन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा।
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वहीं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रोजगार सेवकों के वेतन के लिए राष्ट्रीय रोजगार गारंटी एक्ट के तहत अलग से बजट आता था, जोकि पिछले तीन माह से बंद पड़ा है। जिसके चलते इन्हें मासिक वेतन भुगतान करने में देरी हो रही है। कई जगह पंचायत में भर्ती किए कंप्यूटर ऑपरेटरों को भी वेतन नहीं मिला है।
उधर, ग्रामीण विकास अभिकरण के परियोजना अधिकारी एवं उपनिदेशक केडीएस कंवर ने बताया कि ग्रामीण रोजगार सेवकों को क्यों वेतन नहीं मिल रहा, इस बारे में ब्लॉक स्तर पर खंड विकास अधिकारी ही इसका जवाब दे सकते हैं। लेकिन हां, इस बारे में ग्रामीण रोजगार सेवकों की ओर से शिकायत मिली है।
वहीं खंड विकास अधिकारी हमीरपुर अस्मिता ठाकुर ने बताया कि मनरेगा में अलग से बजट के तहत ही ग्रामीण रोजगार सेवकों को वेतन का भुगतान किया जाता है। लेकिन अभी तक ग्रांट न आने से देरी हो रही है।
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कर्मचारियों को समय पर मिलना चाहिए वेतन: शर्मा
हिमाचल प्रदेश राज्य बार काउंसिल के सदस्य एडवोकेट रोहित शर्मा ने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लागू करने में कर्मचारियों की अहम भूमिका होती है। डबल इंजन की सरकार का दावा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि किन कारणों से कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा। हर कर्मचारी को अपने परिवार के पालन पोषण के लिए कई तरह की जिम्मेवारियों का निर्वहन करने के लिए पैसों की जरूरत होती है। इसलिए रोजगार सेवकों का वेतन प्राथमिकता के आधार पर समय पर जारी करना चाहिए।
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