सत्र में न्यूनतम दो बार तबादले के लिए समय तय करने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। प्रदेश सरकार ने हाल ही में कैबिनेट मीटिंग में शिक्षकों के तबादलों पर प्रतिबंध का निर्णय लिया है। राजकीय टीजीटी कला संघ ने इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कौशल और प्रदेश महासचिव विजय हीर ने कहा कि वर्तमान सत्र 2024-25 में तबादले नाममात्र हुए हैं क्योंकि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता सत्र के शुरू में ही लग चुकी थी और उसके उठने के तत्काल बाद हमीरपुर, सोलन और कांगड़ा में विधानसभा उपचुनाव की आचार संहिता लगी थी। इसके हटने के एक सप्ताह में ही तबादलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इससे करीब दस हजार शिक्षकों के तबादले रुक गए हैं। इनमें से अधिकांश तबादले के लिए जरूरी प्रक्रिया सचिवालय में पूरी हो चुकी थीं और प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से पूर्ण की जा चुकी प्रक्रिया को आगे लागू करने में एक सप्ताह का ही समय लगना था।
नियमानुसार सामान्य रूप से तबादले सत्र के शुरू में किए जाते हैं और इस सत्र में तबादले कोर्ट के आदेशों पर आचार संहिता में भी होते रहे और शेष सामान्य तबादले नहीं हो पाए। ऐसे में अगर सरकार पांच अगस्त तक भी तबादले होने देती तो हजारों तबादले एक साथ करने की नौबत नहीं आएगी। सत्र के अंत में तबादलों की बाढ़ आने पर शिक्षा विभाग और सचिवालय के लिए एक साथ 15 हजार से ज्यादा तबादले हैंडल करना मुश्किल होगा और ऐसे में जारी आदेशों में अनेकों त्रुटियां भी रह सकती हैं। सत्र में न्यूनतम दो बार तबादले के लिए समय तय किया जाना चाहिए ताकि शिक्षक वर्ग को भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।