वन बीट कुठेड़ा के संदोल-एक में जले लकड़ी के स्लीपर। स्रोत जागरूक पाठक
हमीरपुर। जंगलों में भड़क रही आग अब सिर्फ हरियाली ही नहीं निगल रही, बल्कि सरकारी संपत्ति भी उसकी भेंट चढ़ रही है। जंगलों में केवल आग से ही वन संपदा राख नहीं हो रही है, बल्कि अव्यवस्था से संपति राख हो रही है।
यही वजह है कि सुजानपुर-हमीरपुर सड़क किनारे और जंगल में दर्जनों स्लीपर आग की भेंट चढ़ गए। वन बीट कुठेड़ा के अंतर्गत वन बीट कुठेड़ा संदोल-एक जंगल में रखे गए 63 लकड़ी के स्लीपर आग में जलकर राख हो गए।
इस घटना से वन निगम कॉर्पोरेशन को करीब चार क्यूबिक मीटर लकड़ी का नुकसान हुआ है। जले स्लीपरों की कीमत लाखों रुपये में आंकी जा रही है।
जानकारी के अनुसार चबूतरा के साथ लगते जंगल में वीरवार दोपहर को आग लगी थी, जो रात में तेज हवाओं के कारण कुठेड़ा बीट तक पहुंच गई। इसी दौरान जंगल में रखे स्लीपर भी आग की चपेट में आ गए।
बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में फरवरी में लकड़ी का कटान कार्य शुरू हुआ था, जो 15 अप्रैल को पूरा हुआ था। कटान के बाद तैयार स्लीपर लंबे समय तक मौके पर ही पड़े रहे। विभाग द्वारा संबंधित ठेकेदार को फायर सीजन से पहले लकड़ी हटाने के लिए दो बार नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद स्लीपर नहीं उठाए गए।
घटना के बाद विभागीय निगरानी व्यवस्था और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर लकड़ी हटा ली जाती तो यह सरकारी नुकसान टाला जा सकता था।
कोट
ठेकेदार की लापरवाही के कारण वन निगम को नुकसान हुआ है। नुकसान की भरपाई के लिए संबंधित ठेकेदार पर जुर्माना लगाया जाएगा।
-सुमन कुमार, फॉरेस्ट गार्ड, वन निगम कॉर्पोरेशन
वन बीट कुठेड़ा के संदोल-एक में जले लकड़ी के स्लीपर। स्रोत जागरूक पाठक