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Hamirpur (Himachal) News: पशुशालाओं तक लावारिस कुत्तों का आतंक, एक साल में 200 पालतू पशुओं को बनाया शिकार

Sat, 23 May 2026 01:12 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
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नगर निगम हमीरपुर के तहत हमीरपुर बाजार में बैठे लावारिस कुत्ते। संवाद - फोटो : जनता दर्शन में जन ​शिकायतें सुनतीं डीएम अन्नपूर्णा गर्ग।
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हमीरपुर। जिले में लावारिस कुत्तों का बढ़ता आतंक अब इंसानों के साथ-साथ पशुधन के लिए भी गंभीर समस्या बनता जा रहा है। हालात यह हैं कि पशुशालाओं में बंधे पालतू पशु भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। पिछले एक वर्ष में करीब 200 पालतू पशुओं को लावारिस कुत्तों ने अपना शिकार बनाया है।
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जानकारी के अनुसार कुत्तों के झुंड रात के समय गांवों में पशुशालाओं और घरों के आसपास पहुंचकर बकरियों, भेड़ों, बछड़ों और अन्य छोटे पशुओं पर हमला कर रहे हैं। इससे कई पशु गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनके इलाज में पशुपालकों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगली जानवरों के हमलों में पशुओं की मृत्यु होने पर मुआवजे का प्रावधान है, लेकिन लावारिस कुत्तों के हमलों में घायल पशुओं के लिए किसी प्रकार की सहायता नहीं मिलती, जिससे उन्हें पूरा नुकसान स्वयं उठाना पड़ रहा है।
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कुत्तों की बढ़ती संख्या के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में भी भय का माहौल है। सुबह और शाम के समय सड़कों पर झुंड के रूप में घूमते कुत्ते लोगों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहे हैं।
इसके बावजूद धरातल पर इन लावारिस कुत्तों को पकड़ने या नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस अभियान नजर नहीं आ रहा है।



पंचायतों के पास कोई व्यवस्था ही नहीं

पंचायत के जरिये केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाया जाता है। त्रिस्तरीय पंचायतीराज व्यवस्था में अभी तक इस गंभीर समस्या से निपटने को कोई ठोस योजना ही नहीं बनाई गई है। यही वजह है कि पंचायत स्तर पर इस समस्या से निपटने के लिए समाधान तो दूर प्रयास तक नहीं हो सके हैं।

कोट
जिले में पिछले एक वर्ष में लावारिस कुत्तों के काटने के करीब 200 मामले सामने आए हैं। इनमें गाय, भैंस, भेड़ और बकरियां आदि शामिल हैं। पशुपालन विभाग की ओर से राहत के रूप में वैक्सीन निशुल्क लगाई जाती है। -सतीश कपूर, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग, हमीरपुर

नगर निगम हमीरपुर के तहत हमीरपुर बाजार में बैठे लावारिस कुत्ते। संवाद- फोटो : जनता दर्शन में जन शिकायतें सुनतीं डीएम अन्नपूर्णा गर्ग।

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