हमीरपुर। सेवानिवृत्ति के बाद जहां अधिकांश लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं, वहीं कुठेड़ा के 69 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षा उपनिदेशक डीआर शर्मा ने खेती और बागवानी को अपनी नई पहचान बनाया है। डीआर शर्मा ने पहले शिक्षा की लौ जलाई और अब किसानों-बागवानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
सात कनाल भूमि में उन्होंने ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो किसानों और बागवानों को खूब पसंद आ रहा है। डीआर शर्मा खेतों में दोहरी खेती की तकनीक से आलू, मटर, गेहूं, मक्की, मूली, शलगम, टमाटर, हरा धनिया, प्याज और लहसुन की फसल ले रहे हैं। साथ ही बगीचे में सेब, नाशपाती, कीवी, मौसंबी, बादाम, आम, लीची, अंगूर, गलगल, नींबू और केले सहित एक दर्जन से अधिक प्रजातियों के फलदार पौधे लगाए हैं, जो अब भरपूर उत्पादन दे रहे हैं।
बीते वर्ष उन्होंने 35 हजार रुपये की कीवी और तीन क्विंटल से अधिक सेब बेचे। आलू, मूली और सेब को बेचकर लाखों रुपये की आमदनी हुई थी, जबकि इस बार दस क्विंटल से अधिक उत्पादन की उम्मीद है। डीआर शर्मा देसी खाद के प्रयोग से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
उनका कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने कभी रसोई के लिए बाजार से फल-सब्जियां नहीं खरीदीं। घर की हर जरूरत खेतों से ही पूरी हो रही है। उन्होंने एक प्रवासी परिवार को भी खेती के लिए प्रेरित किया, जो उनके बगीचे में आलू और मटर की फसल उगा रहा है और इस परिवार की रोजी-रोटी भी इस जमीन से चल रही है।
विभागीय अधिकारियों ने किया निरीक्षण
बुधवार को कृषि विभाग के उपनिदेशक शशिपाल अत्री, बागवानी विभाग के उपनिदेशक राजेश्वर परमार और एपीएमसी चेयरमैन अजय शर्मा ने उनके खेतों व बगीचे का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए अन्य किसानों को भी इससे प्रेरणा लेने का आह्वान किया। कोल्ड स्टोर निर्माण की योजना पर भी चर्चा हुई।
कोट
डीआर शर्मा की पहल अन्य किसानों के लिए मिसाल है। मुख्यमंत्री सुक्खू प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं और कृषि उपज के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की गई है। एपीएमसी ऐसे किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर विजिट कर उनकी समस्याएं सुन रही है।
-अजय शर्मा, चेयरमैन, एपीएमसी हमीरपुर
प्रगतिशील किसान डीआर शर्मा के बगीचे में निरीक्षण को पहुंचे एपीएमसी चेयरमैन अजय शर्मा एवं विभागी