हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में ओएसटी (ओपिएड सब्सिट्यूशनल थेरेपी) सेंटर बनाया गया है। सेंटर में इंजेक्शन से नशा कर रगों में जहर घोल रहे लोगों को इस लत से आजादी मिलेगी।
अभी तक यहां पर चार लोगों का इलाज शुरू हो गया है। नशे की लत में फंसे लोग रोजाना यहां आकर चिकित्सकों की देखरेख में दवाइयां खा रहे हैं। जो लोग गलत संगत में नशे की लत से अपनी सेहत बिगाड़ चुके हैं, उनका समूचित उपचार किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश एड्स कंट्रोल सोसायटी की ओर से सेंटर की स्थापना की गई है। बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण चौधरी, चिकित्सा अधीक्षक मेडिकल कॉलेज हमीरपुर डॉ. देशराज शर्मा और एएसपी राजेश ने सेंटर का दौरा किया और यहां पर दी जा रही सुविधाओं की जांच की।
इस मौके पर सोसायटी ऑफ हेली वेलफेयर से वीरेंद्र मनोचिकित्सक डाॅक्टर कमल प्रकाश काउंसलर नीलम मौजूद रहे। युवाओं में नशाखोरी की बढ़ती प्रवृति को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है।
इस सेंटर पर न सिर्फ नशाग्रस्त मरीजों की जांच होगी, बल्कि दवा भी दी जाएगी। इससे नशे के लत के शिकार मरीजों की लत धीरे-धीरे छूट सकेगी। एक एनजीओ की सहायता से नशे की लत में फंसे लोगों की पहचान की जा रही है।
इंजेक्शन की लत से कई गंभीर बीमारियों का खतरा
इंजेक्शन की लत से कई गंभीर बीमारियों का खतरा होता है। जो समूह बनाकर एक ही इंजेक्शन से आपस में नशा करते हैं। उनमें गंभीर रोग होने की भी आशंका होती है। एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, क्षय रोग समेत कई बीमारियां हो सकती हैं। नशे की लत में फंसे लोगों को नशे से होने वाले संभावित खतरे, जीवन संकट, परिवार की स्थिति, आर्थिक नुकसान, सामाजिक उपेक्षा और जीवन यापन में तकलीफ के बारे में बताया जा रहा है।
-कोट
मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में ओपिएड सब्सिट्यूशनल थेरेपी सेंटर बनाया गया है। अब तक चार लोग यहां पर पंजीकृत हो चुके हैं।
-डॉ. देशराज शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर