हमीरपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) हमीरपुर में आयोजित राष्ट्रीय फैकल्टी विकास कार्यक्रम के तहत मंगलवार को विशेषज्ञों ने शोध को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचाने और नवाचार को सफल स्टार्टअप में बदलने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
सीएसआईआर-केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन, चंडीगढ़ के वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र सिंह सैनी ने ‘एमवीपी : व्यावसायीकरण की ओर पहला कदम’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी विचार को व्यवसाय में बदलने से पहले न्यूनतम व्यवहार्य उत्पाद (एमवीपी) तैयार कर उसे वास्तविक परिस्थितियों में परखना जरूरी है।
ग्राहकों की जरूरतों को समझना, बाजार अध्ययन और पायलट परीक्षण से उत्पाद को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने एयरबीएनबी, उबर, ड्रॉपबॉक्स, जोमैटो, पेटीएम, इंस्टाग्राम और ओयो जैसे सफल स्टार्टअप का उदाहरण देते हुए कहा कि शुरुआती चरण में परीक्षण और ग्राहकों से मिले सुझाव व्यवसाय को सही दिशा देते हैं।
शाम के सत्र में सीएसआईआर-केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन, चंडीगढ़ के वैज्ञानिक डॉ. नीलेश कुमार ने ‘प्रयोगशाला से बाजार तक : ट्रांसलेशनल रिसर्च’ विषय पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ट्रांसलेशनल रिसर्च वैज्ञानिक खोजों को व्यावहारिक समाधान और बाजार उपयोगी उत्पादों में बदलने की महत्वपूर्ण कड़ी है।
उन्होंने शोधकर्ताओं से समाज की जरूरतों के अनुरूप नवाचार विकसित करने का आह्वान किया।