डॉ. राकेश शर्मा बबली के पिता को ढांढस बंधाती उपायुक्त देवश्वेता बनिक।
- फोटो : Hamirpur-HP
बिझड़ी (हमीरपुर)। हिमाचल प्रदेश कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राकेश बबली की आकस्मिक मृत्यु से हर कोई स्तब्ध है। रविवार को उनका पार्थिव शरीर पार्टी के झंडे से लिपटा हुआ घर पहुंचा। 12 साल की उम्र में डॉ. राकेश संघ की शाखाओं से जुड़ गए थे। 1998 से लेकर 2010 तक एबीवीपी के पूर्णकालिक सदस्य रहे। 2022 तक भारतीय जनता पार्टी की सेवा पूरे तन मन धन से की। जिस तरह की कार्यशैली डॉक्टर राकेश बबली की रही है, उसकी सभी प्रशंसा करते थे और आने वाले विधानसभा चुनाव में भी वह बड़सर विधानसभा क्षेत्र से प्रमुख दावेदार थे। लेकिन, एक ही दिन में परिवार की जिंदगी भर की खुशियां गम में बदल गईं।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर से बतौर एबीवीपी इकाई सचिव शुरू हुआ राकेश बबली का राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा। वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संगठन मंत्री, प्रदेश संगठन मंत्री, दिल्ली में प्रांत संगठन मंत्री रहे। वर्ष 2010 से 2013 तक भाजयुमो की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी अहम भूमिका निभाई। 2010 में बिहार में चुनाव प्रभारी रहे। इसके बाद उत्तराखंड में भी चुनाव प्रभारी रहे। हिमाचल में जसवां परागपुर में हुए चुनाव में जीत के हीरो बने। चंडीगढ़ में हुए नगर निगम चुनाव में भी अहम रणनीतिक भूमिका निभाई। 2014 में लोकसभा के चुनाव में विस्तारक के रूप में भी काम किया।
2014 में ही हरियाणा के कुरुक्षेत्र में लोकसभा के चुनाव में चार में से तीन सीटें जीतीं। 2015 में जम्मू-कश्मीर के राजौरी और कालाकोर्ट विधानसभा सीटों पर भी इनके नेतृत्व में भाजपा ने कब्जा किया। 2017 में उत्तराखंड के यम्केश्वर में चुनाव प्रभारी रहे और जीत हासिल की। वर्तमान में डॉ. राकेश बबली हिमाचल प्रदेश भाजपा सरकार में कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष थे और साथ में हिमाचल प्रदेश किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष थे। उनकी क्षति क्षेत्र के लिए अपूर्णनीय है।