मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में पर्ची काउंटर पर उमड़ी भीड़। गर्मी के कारण खुले में मरीजों को दिक्कतों क?
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हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर में चिकित्सकों की पेन डाउन स्ट्राइक के कारण मरीजों का मर्ज बढ़ रहा है, लेकिन अभी तक सरकार के स्तर पर इस मामले में कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा सकी है। सुबह साढ़े नौ बजे से साढ़े ग्यारह बजे तक अस्पताल की सभी ओपीडी में स्वास्थ्य सेवाएं बंद रहीं। केवल आपातकालीन ओपीडी में ही कुछेक मरीजों को स्वास्थ्य लाभ मिल पाया। साढ़े 11 बजे तक मेडिकल कॉलेज की सभी ओपीडी के बाहर मरीजों की भीड़ उमड़ी। मेडिकल कॉलेज के कुछ चिकित्सक मांगों को लेकर पेनडाउन स्ट्राइक पर हैं।
मरीज साढ़े ग्यारह बजे हड़ताल खत्म होने और ओपीडी खुलने का इंतजार करते रहे। उपचार के लिए आए मरीज ओपीडी के बाहर दो घंटे तक इंतजार करते रहे। इस दौरान गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज, गर्भवती महिलाएं और वृद्ध मरीजों ने अपने तीमारदारों को कतारों में खड़ा किया व खुद बेंच पर बैठ गए। ग्यारह बजे के बद अस्पताल की ओपीडी शुरू हुई तो ओपीडी के बाहर मरीजों में पहले उपचार करवाने की होड़ मच गई।
मेडिकल कॉलेज की रेजिंडेट डॉक्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. नीरज ने कहा कि कॉलेज की प्राचार्य को भी अपनी मांगों और हड़ताल के संबंध में पूर्व में ही अवगत करवाया जा चुका है। मंगलवार 29 जून से एसोसिएशन रोजाना दो घंटे की पेनडाउन स्ट्राइक पर है। जिले के अन्य अस्पतालों में भी चिकित्सक दो घंटे की पेनडाउन स्ट्राइक पर रहे। अस्पताल के चिकित्सकों ने पंजाब पे कमीशन के आधार पर प्रदेश के चिकित्सकों को भी नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस कम करने पर विरोध जताया है। पंजाब पे कमीशन के आधार पर एनपीए को 25 फीसदी से पांच फीसदी ही रखा गया है, जबकि 20 फीसदी काटा गया है। प्रदेश में भी पंजाब की तर्ज पर ही वेतन मिलता है, इसलिए चिकित्सक इस निर्णय से खफा है। वहीं, कोविड हेल्थ सेंटरों में ड्यूटी के बाद चिकित्सकों की संगरोध अवधि भी खत्म करने पर चिकित्सकों ने रोष जताया है। इसके अलावा चिकित्सकों के साथ जिला चंबा में हुए दुर्व्यवहार पर कोई कार्रवाई न होने से भी चिकित्सक नाराज हैं।