नादौन (हमीरपुर)। सिविल अस्पताल नादौन में बुधवार देर रात एक मरीज के परिजनों और चिकित्सकों के बीच बहस हो गई। यह बहस सरकारी एंबुलेंस को निजी अस्पताल न भेजने को लेकर हुई। इससे अस्पताल के चिकित्सकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
दरअसल बुधवार शाम को एक बुजुर्ग रोगी को दिल की बीमारी के कारण नादौन अस्पताल लाया गया। यहां पर प्राथमिक उपचार के बाद परिजन मरीज को निजी अस्पताल ले जाने की मांग करने लगे। लेकिन उन्हें सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाई। हालांकि कुछ समय बाद उनकी समस्या का समाधान एक समाजसेवक ने कर दिया। बुजुर्ग को जब नादौन अस्पताल लाया गया तब उनकी तबीयत ज्यादा खराब थी। इसके कारण परिजन उन्हें बड़सर क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस भेजने के लिए दबाव बनाने लगे। वहीं अस्पताल प्रशासन ने नियमों का हवाला देकर निजी अस्पताल तक एंबुलेंस भेजने से इनकार कर दिया और रोगी को हमीरपुर या टांडा तक एंबुलेंस में ले जाने के लिए कहा, लेकिन परिजन रोगी को निजी अस्पताल ही ले जाना चाहते थे। इस बीच उन्हें निजी एंबुलेंस ले जाने के लिए भी कहा गया, लेकिन रात के समय अस्पताल में उपलब्ध एक निजी एंबुलेंस का चालक उपलब्ध नहीं हो पाया। रोगी को ऑक्सीजन की आवश्यकता थी। एंबुलेंस और अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन उपलब्ध थी लेकिन रोगी को किसी अन्य वाहन में ले जाने के लिए ऑक्सीजन का छोटा सिलिंडर अस्पताल में उपलब्ध नहीं था। सूचना मिलने पर एसडीएम नादौन विजय कुमार मौके पर पहुंच गए। इसके बाद जैसे-तैसे शहर के एक व्यापारी एवं समाजसेवक युवक के साथ संपर्क किया गया। जिन्होंने रोगी को ले जाने के लिए न केवल एक निजी वाहन उपलब्ध करवाया बल्कि ऑक्सीजन का सिलिंडर भी उपलब्ध करवाया।
बीएमओ डॉ. बीएस राणा ने बताया कि एंबुलेंस को हमीरपुर ही भेजा जा सकता है। इसे किसी निजी अस्पताल तक नहीं भेज सकते हैं।